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कानून व्यवस्था पर सवाल

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इस साल कांवड़ यात्रा के दौरान जिस तरह की तस्वीरें जगह—जगह से सामने आई है निसंदेह वह अत्यंत ही चिंतनीय है और निंदनीय है। आस्था के नाम पर इस देश में आखिर यह हो क्या रहा है हर कोई इसे देखकर हैरान और परेशान है। मिर्जापुर से आई वह तस्वीर जिसमें कुछ कावंड़ियों द्वारा एक आरपीएफ के बावर्दी जवान को भी जमीन पर गिराकर किसी जानवर की तरह पीटा जा रहा है। ऋषिकेश से आयी एक तस्वीर में एक कार सवार युवक के साथ भी कांवड़िये सड़क पर ऐसा ही कुछ करते हैं युवक किसी तरह से उठकर भागता है और एक सुरक्षाकर्मी से डंडा छीनकर कावड़ियों पर टूट पड़ता है। जब पुलिस व कुछ लोग उसे रोकते हैं तो वह पूछता है कि अभी जब यह कावड़िये मुझे सड़क पर गिरा कर पीट रहे थे तब आप कहां थे? इन कावड़ियों द्वारा महिलाओं से भी मारपीट, दुकानों में तोड़फोड़ तथा लूटपाट, पुलिस के साथ झड़पों से लेकर संघर्ष और पुलिस लाठीचार्ज जैसी घटनाओं से सोशल मीडिया भरा पड़ा है। अराजकता का जो नंगा नाच इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान देखा गया है शायद इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। सवाल यह है कि इन कांवड़ियों के अंदर यह अराजकता फैलाने की ताकत कहां से आई? क्या राज्य सरकारों का पुलिस प्रशासन इतना नकारा व डरपोक हो चुका है कि वह इन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। एक और भी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें पुलिस की वर्दी पहने एक सिपाही कावड़ियों के हाथ पैर दबा रहा है। इस बात को वह खुद भी जानता होगा कि ऐसा वह कावड़ियों की सेवा के भाव से कर रहा है या कावड़ियों की दबंगई के चलते लेकिन क्या यह तस्वीर पुलिस की वर्दी को शर्मसार करने वाली नहीं है। अगर कावड़ियों की सेवा ही करनी थी तो कम से कम पुलिस की वर्दी तो उतार कर ही कर लेता। यूपी के मुख्यमंत्री योगी का कहना है कि कांवड़िया थक गया होगा। निश्चित तौर पर सरकारों द्वारा कांवड़ियों पर बरसाए जाने वाले फूलों और उनके स्वागत सम्मान ने ही कांवड़ियों को उत्पात मचाने की हद तक लाने का काम किया है। कांवड़ियों की अब यह सोच बन चुकी है कि वह कावड़ यात्रा के दौरान कुछ भी करें उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इन कावंड़ियों द्वारा सड़कों पर इस तरह चला जा रहा है कि जैसे कि वह चुनौती दे रहे हो कि कोई कुछ कह कर तो देखें आम आदमी भी इनसे बचकर बस किसी तरह निकालना चाहता है हाथों में लाठी डंडे लेकर आगे पीछे चलने वाले युवाओं से जब पुलिस प्रशासन की कुछ कहने की हिम्मत नहीं तो आम आदमी की तो बिसात ही क्या है? यूपी के सीएम योगी ने कावड़ यात्रा के लिए 5 दिनों के लिए स्कूल कॉलेजों तक को बंद कर दिया स्कूलों कॉलेजों से कांवड़ यात्रा का क्या संबंध है यह तो सीएम ही जान सकते हैं लेकिन अभी डाक कांवड़ जो कल तक चलेगी कांवड़ियों का यह उन्माद किस सीमा तक जाता है इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन सोशल मीडिया पर कंावड़ की खबरों पर खूब बहस हो रही है।

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