उत्तराखंड सरकार राज्य में हेली सेवा संचालन के लिए एसओपी बनाएगी? अच्छी बात है एक दशक बाद ही सही सरकार को यह बात याद तो आ गई कि हेली सेवा संचालन के लिए नियम और कानून बनाए जाने की जरूरत है। सवाल यह है कि सरकार द्वारा जब केदार धाम के पुनर्निर्माण का प्लान तैयार किया गया था तभी हेली सेवाओं के संचालन के लिए एसओपी बनाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी लेकिन न तो केदारनाथ पुनर्निर्माण के काम में इसे शामिल किया गया और न बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान में इसे तवज्जो दी गई। अब जब हर साल हेली दुर्घटनाओं का तांता लग चुका है तो सरकार की नींद टूटी है काश इस मुद्दे पर पहले ही सोच लिया जाता तो इन दुर्घटनाओं में इतने जान माल का जो नुकसान हुआ है उससे बचा जा सकता था। बीते कल उड्डयन सचिव कुर्वे की तरफ से सचिव गृह श्ौलेश बगौली द्वारा यह जानकारी दी गई कि उनकी अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है जिसमें डीजी, सीए मौसम विभाग, यूकाडा, हवाई यातायात प्रबंधन व आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति दुर्घटनाओं का विश्लेषण करेगी रोकने के उपाय सुझाएगी यूकाडा के प्रशासनिक अमले में तथा संसाधनों में सुधार पर अपने विचार रखेगी। मौसम और दूरसंचार विभाग से जुड़ी जानकारी का कैसे लाभ उठाया जा सकता है तथा हवाई यातायात को कैसे और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है इस पर अपनी राय रखेगी। जिसके आधार पर सरकार हेली सेवा के लिए नई गाइडलाइन तैयार करेगी। इन चार धामों की हवाई दुर्घटनाओं के इतिहास पर नजर डाले तो अब तक जून 2013 से लेकर कई बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी है एमआई—17 हेलीकॉप्टर क्रैश में 20 अधिकारी, जवानों की मौत से लेकर बीते दो दिन पूर्व गौरीकुंड में 7 यात्रियों की मौत तक तमाम हादसों में अनेक लोगों की जाने जा चुकी है। लगातार हो रहे हेली दुर्घटनाओं के कारण राज्य की छवि इस कदर खराब हो रही है कि लोग अब हेली सेवा के इस्तेमाल से डरने लगे हैं। लोग यह सोचने पर विवश है कि कहीं उनकी यह यात्रा अंतिम यात्रा तो नहीं हो जाएगी। अगर अपनी सुरक्षा को लेकर यात्री इस कदर भयभीत है तो ऐसी यात्रा पर भला कौन आना चाहेगा। उत्तराखंड की हेली सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के साथ दलालों और साइबर अपराधियों की ठगी के मामले भी इन यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन रहे हैं। इसके अलावा हेली कंपनियों द्वारा सिर्फ अपनी कमाई के लिए काम की नियत और यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान न रखा जाना भी बड़ी समस्या है। एक तो हेलीकॉप्टर खटारा ऊपर से उसमें ओवरलोडिंग, यात्रियों की जान पर भारी पड़ती रही है। अभी जिस हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना में सात लोगों की जान चली गई उसकी सीटिंग कैपेसिटी 6 लोगों की थी तथा हेली सेवाओं का संचालन समय सूची के अनुसार न करने की बात भी सामने आई थी। देखना है कि यह नई एसओपी कब तक बन पाती है और इसका कितना लाभ यात्रियों को हो पाता है।



