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पर्यटकों की सुरक्षा भी जरूरी

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उत्तराखंड में चार धाम यात्राओं के दौरान लगातार घटित होने वाली हेली दुर्घटनाओं पर हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिया जाना और राज्य सरकार को इन दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस नीतियां निर्धारित करने के निर्देश दिया जाना, शासन—प्रशासन की लापरवाही को ही दर्शाता है। राज्य सरकार द्वारा खुद इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना जरूरी था लेकिन दुर्घटनाएं होती रही लोगों की जाने जाती रही शासन—प्रशासन कभी इन दुर्घटनाओं की जांच कराने के आदेश देने से आगे नहीं बढ़ सका। जबकि राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर यह अत्यंत ही जरूरी था। हास्यापद बात है कि अभी तक राज्य में जितनी हेली दुर्घटनाएं हुई है और जिनकी जांच के आदेश दिए गए हैं उनमें से किसी एक भी घटना की जांच सामने नहीं आई है और न यह पता चल सका है कि इस जांच के आधार पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है। सरकार साल दर साल चार धाम यात्रा और अन्य पर्यटकों की आमद में बनते नए रिकॉर्डो को लेकर तो अपनी पीठ थपथपाती रहती है लेकिन यात्रियों की जान माल की सुरक्षा का वैसा पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाती जैसी जरूरत होती है। हर साल विभिन्न कारणों से सैकड़ो की संख्या में यात्रियों की अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसमें कोई संदेह की बात नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं हो सकता। 2013 में केदारनाथ में हुई भीषण तबाही इसका सबसे बड़ा उदाहरण है लेकिन रोड जाम और हेली दुर्घटनाओं को आपदा की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है मानवीय चूक या व्यवस्थागत खामियों के कारण किसी एक भी यात्री की जान अगर जाती है उसे नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाले मौसम के बदलाव पर अगर गंभीरता से नजर रखी जा सके तो बहुत हद तक यात्रियों को मुश्किलों से बचाया जा सकता है। गौरीकुंड में हुई ेेहेली दुर्घटना का मुख्य कारण मौसम के अपडेट को नजर अंदाज किया जाना तथा नियम कानूनो का उल्लंघन ही कारण के रूप में सामने आ रहा है। राज्य में जो भी कंपनियां हेली सेवा प्रदान कर रही है उनके द्वारा खटारा हेलीकॉप्टरो का इस्तेमाल करने की बात अब तक अनेक बार सामने आ चुकी है लेकिन क्या सरकार द्वारा ऐसी कोई व्यवस्था भी की जा सकती है कि इसे रोका जा पाता। अभी बीते दिनों ऋषिकेश एम्स से जो हेली एंबुलेंस केदारनाथ से एक बीमार महिला को एयरलिफ्ट करने को भेजी गई थी वह हेली पैड पर उतरने से पूर्व ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसमें डॉक्टरों की टीम भी बाल—बाल बच पाई थी। इस एक एम्स एयर एम्बुलेंस के खटारा होने की बात पहले ही दिन से कहीं जा रही है क्योंकि यह अपने पहले ही ट्रायल में फेल साबित हो गई थी देखना यह है कि हाई कोर्ट के द्वारा अब राज्य सरकार को जो भी दिशा निर्देश दिए गए हैं वह राज्य की हेली सेवाओं मेें कितना सुधार ला पाती हैं तथा यात्रियों को कितना सुरक्षा प्रदान कर पाती हैं। सरकार पर्यटन से होने वाली अपनी कमाई को तभी बढ़ा सकती है जब पर्यटकों को बेहतर सुविधा और सुरक्षा की गारंटी देगी।

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