पहलगाम आतंकी हमले के बाद भले ही केंद्र सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाक के आतंकी ठिकानों को हमारी सेना ने मिटृी में मिला दिया हो लेकिन सीज फायर के फैसले के बाद भी ऑपरेशन सिंदूर जारी है। भारतीय जनता पार्टी की शौर्य यात्राएं तो जारी है ही साथ ही वह अपने इस पराक्रम की गाथा के लिए विश्व राष्ट्रों का समर्थन जुटाने में लगी हुई है। खुद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने भी मोर्चा संभाल लिया है तथा वह रोड शो और जनसभाओं के जरिए जनता को अपनी इस बड़ी उपलब्धि के बारे में बता रहे हैं। गृहमंत्री का कहना है कि जो एक चुटकी सिंदूर की कीमत नहीं जानते थे हमने इस ऑपरेशन सिंदूर के जरिए उन्हें सिंदूर की कीमत समझा दी है। वही प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि जो हमारी माता बहनों का सिंदूर पोछने का काम करेगा उसका हम क्या हश्र करेंगे हमने यह बात ऑपरेशन सिंदूर के जरिए बता दी है। प्रधानमंत्री कभी गोली के जवाब में गोले से देने की बात कहते हैं तो कभी पाकिस्तान को हिदायत देते है चैन से रहो रोटी खाओ नहीं तो फिर मेरी गोली तो है ही। उनके द्वारा अब ऑपरेशन सिंदूर को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उसे लेकर विपक्ष हमलावर है। विपक्ष जिसने बिना शर्त कोई भी फैसला लेने और उसमें बिना किसी के सहयोग करने की बात कही थी और ऐसा करके भी दिखाया लेकिन विपक्ष सरकार के सीज फायर से लेकर ट्रंप के बिचौलिए बनने और राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के शौर्य पर राजनीति करने को कतई भी बर्दाश्त न किया जाना स्वाभाविक है। विपक्ष द्वारा सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह संसद का विशेष सत्र बुलाए और संसद में प्रधानमंत्री विपक्ष के सवालों का जवाब दे कि वह और उनके मंत्री ऐसा क्यों कर रहे हैं? विपक्ष के सभी सवालों से बचने का उनके द्वारा एक और नायाब तरीका ढूंढ निकाला गया है। वह विपक्षी दलों के नेताओं से टीम इंडिया बनाने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि सभी राज्यों की सरकार और केंद्र की सरकार को मिलकर काम करना चाहिए तभी विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनका कहना है कि जब तक सभी राज्य विकसित नहीं होंगे तब तक भारत विकसित कैसे हो सकता है। बात चाहे छत्तीसगढ़ की हो या फिर केरल और पश्चिम बंगाल की जहां भी गैर भाजपा की सरकार है वहां की किस—किस विकास योजना का कितना पैसा केंद्र की सरकार द्वारा रोका हुआ है यह बात भी प्रधानमंत्री को बतानी चाहिए इसके साथ ही यह भी बताना चाहिए कि क्यों रोका गया है उनके द्वारा अब विदेशी सामान के बहिष्कार की अपील की जा रही है और विकसित भारत के लिए स्वदेशी अपनाने की दलील भी दी जा रही है। क्या प्रधानमंत्री मोदी को यह नहीं पता है कि उन्होंने बीते 10 सालों में ंदेश के लघु और सूक्ष्म उघोगों को खत्म कर दिया है। विदेशी आयात और विदेशी उघोगों के भरोसे तो देश के व्यवसायी जिंदा है। लोगों को थोड़ा बहुत मजदूरी के काम मिल पा रहे हैं। देश की जनता को प्रधानमंत्री से यह जरूर पूछना चाहिए कि विदेशों से व्यापार बंद करके और विदेशी निवेश को रोक कर भारत कैसे विकसित राष्ट्र बन सकता है हो सकता है उनके कुछ उघमी मित्रों द्वारा उन्हें कोई ऐसा विकास का फार्मूला समझा दिया गया हो जिस देश के अर्थशास्त्री अभी तक नहीं समझ सके हैं। देश में जो कुछ हो रहा है वह सब कुछ राम भरोसे चल रहा है। देखना यह है कि यह सब कुछ कब तक चलेगा?



