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भ्रष्टाचार का खात्मा

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार को कतई भी बर्दाश्त नहीं करेगी शुरू से ही उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है अब तक 150 से अधिक भ्रष्टाचारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल भेजा जा चुका है। आपको याद होगा कि 2017 के विधानसभा के चुनाव हुए थे तो भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में सरकार बनने पर 6 माह के अंदर राज्य में लोकायुक्त के गठन का वायदा किया था। त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में जब सरकार बनी तो विधानसभा के पहले ही सत्र में उनके द्वारा सदन में लोकायुक्त का प्रस्ताव भी लाया गया था जिसे बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस दौरान जब एनएच भूमि अधिग्रहण घोटाले में उन्होंने केंद्र को इस मामले की सीबीआई जांच के लिए पत्र भी लिखा, लेकिन सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि इस तरह तो फिर कोई भी काम नहीं हो पाएगा। इसके बाद न घोटाले का जांच हुई और लोकायुक्त गठन का मामला हमेशा—हमेशा के लिए गायब ही हो गया। इस बाबत कभी अगर उनसे कोई सवाल किया भी गया तो उनका जवाब होता था कि जब राज्य में कोई भ्रष्टाचार ही नहीं रहा तो लोकायुक्त की क्या जरूरत है। यह बात अत्यंत ही हास्यास्पद है कि राज्य में भ्रष्टाचार का जब खात्मा त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल में ही हो गया था तो फिर पुष्कर सिंह धामी ने 150 लोगों को भ्रष्टाचार के मामलों में कैसे जेल भेज दिया गया। कोरोना काल में हरिद्वार कुंभ मेले के आयोजन के दौरान कोरोना टेस्टिंग में करोड़ों का घोटाला हो गया जिसकी गूंज अभी भी सुनाई पड़ रही है। टाइगर सफारी निर्माण में हजारों वृक्षों का अवैध कटान और निर्माण कार्य में करोड़ों का घोटाला सामने आया जिसकी सीबीआई जांच चल रही है। कृषि विभाग में उघान घोटाला हो गया। केंद्र सरकार की अत्यंत ही महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल, हर घर जल, योजना में भयंकर लूट हो गई पाइप लाइन खीची गई घरों में टूटियंा भी लग गइर्, लेकिन पानी एक बूंद भी नहीं टपका। मनरेगा में भारी गड़बड़ी से लेकर चार धाम ऑल वेदर रोड तक अनगिनत घोटालों की लंबी फेहरिस्त इस सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति और भ्रष्टाचार के खात्मों के दावों के बीच लंबी और लंबी होती चली गई। खनन और आबकारी से लेकर छात्रवृत्ति घोटाले तक और नौकरियों में नियुक्तियों से लेकर आयुष्मान योजना तक कहीं भी कोई एक भी क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जहां घोटाले न हुए हो। फिर भी भ्रष्टाचार मुक्त शासन—प्रशासन और भयमुक्त शासन और जीरो टॉलरेंस के दावों में कोई कमी नहीं आई है। लोकायुक्त गठन को लेकर न्यायपालिका तक आदेश देकर थक चुकी है मगर करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी राज्य में लोकायुक्त का गठन नहीं हो सका है। राज्य में भले ही 150 कर्मचारी अधिकारी जेल की हवा खा चुके हो लेकिन इन भ्रष्टाचारियों में कोई एक भी नेता नहीं है प्रदेश की जनता सोच रही है कि भ्रष्टाचारी नेताओं के जेल जाने की घड़ी कब आएगी और कब तक राज्य में यह भ्रष्टाचार की गंगा बहती रहेगी तथा क्या इससे कभी राज्य को मुक्ति मिल पायेगी?

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