यह 21वीं सदी के नए भारत की तस्वीर है डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां साइबर क्राइम से बच पाना आम आदमी के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है वहीं ऑनलाइन जुआ और सटृा देश की युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। 1980 व 90 के दशक में जिस तरह से लाटरी ने लाखों—करोड़ों परिवारों को बर्बादी के कगार पर पहुंचाने का काम किया था ऑनलाइन गेम के जरिए वर्तमान में चल रहा सटृा समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप बन चुका है। अभी आपने देश में होने वाले आईपीएल क्रिकेट मैचों के दौरान ड्रीम—11 का खेल खेलते हुए अपने आसपास तमाम लोगों को देखा होगा। इनाम जीतने वाले कुछ ही लोग होंगे जिन्हें आप जानते होंगे लेकिन इस खेल में हारने वाले आपको बहुत सारे लोग मिल जाएंगे। ऐसे कितने ही खेल खिलाने वाले थे जिसके एक—एक स्लाट में एक करोड़ से भी अधिक लोग हर मैच पर दांव लगाते थे। ऑनलाइन खेले जाने वाले इस गेम में सरकार को भी जीएसटी के रूप में ठीक कमाई हो रही थी वही खिलाने वाले तो हर रोज कई कई करोड़ डकार रहे थे। यह एक प्रत्यक्ष गेम था जो ऑनलाइन चल रहा था इसके साथ हर मैच में परोक्ष तौर पर अरबों रुपए का हर रोज सटृा चल रहा था इसका मुनाफा अकेले सटोरिए ही डकार रहे थे। आपने अपने मोबाइल फोन में छोटा इन्वेस्टमेंट बड़ी कमाई वाले हजारों ऐप के विज्ञापन देखे होंगे जो विज्ञापनों के जरिए आपको इस जुए सटृे के लिए प्रोत्साहित करने के विज्ञापन भी लाते हैं। जिनके अंत में कहा जाता है कि इस खेल में वित्तीय जोखिम शामिल है तथा इसकी लत भी आपको लग सकती है अपनी जिम्मेवारी पर खेले। यह हैरान करने वाले आंकड़े हैं कि देश में 900 ऐसी गेमिंग कंपनियां काम कर रही हैं तथा ऑनलाइन गेमिंग का दायरा 30 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है। देश में 50 करोड़ लोग ऑनलाइन गेम खेल रहे हैं जो देश की कुल आबादी का एक तिहाई से भी अधिक है यानी हर तीसरा आदमी इस गेमिंग के खेल में उलझा हुआ है। उससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि 12 करोड़ से अधिक लोग इस खेल में अपनी गाढ़ी कमाई का बहुत हिस्सा गंवा रहे हैं। रातो रात अमीर बनने की चाहत और सपना रखने वाले युवा इन गेमिंग कंपनियों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं कई सारे एप तो ऐसे हैं जो आपको ऐप डाउन करने पर खेलने के लिए दो—चार हजार रूपये आपके खाते में डाल रहे हैं लेकिन आप इससे सिर्फ रमी जैसे या लूडो जैसे गेम ही खेल सकते हैं इस पैसे को अन्य किसी मद में इस्तेमाल के लिए निकाल नहीं सकते हैं। प्रारंभिक दौर में यह आपको जिता भी सकते हैं जिससे आपको यह भरोसा हो सके कि बस अब कुछ ही दिनों में आप बिना कुछ किए गेम खेल कर ही करोड़पति बन जाएंगे। मगर कुछ दिनों में आप का खाता भी खाली हो सकता है सरकार अब इस ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर शिकंजा कसने जा रही है आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि ऐसी सभी गेमिंग कंपनियों को बंद किया जाएगा जो सटृेबाजी कर रही हैं या उपभोक्ताओं के लिए नुकसान दे है या जिनकी लत लोगों को लग रही है। यह अभी घोषणा भर है लेकिन सरकार का बड़ा एहसान होगा कि वह ऐसा जल्द से जल्द करें क्योंकि इससे भावी पीढ़ी का भविष्य चौपट हो रहा है जिन युवाओं को 8 से 10 घंटे रोज पढ़ना चाहिए वह आठ—दस घंटे रोज गेम खेल रहे हैं और समय व पैसा दोनों की ही बर्बादी कर रहे हैं। अब तो यह ऑनलाइन गेमिंग का खेल धर्मांतरण का तरीका भी बन चुका है इसलिए इसका तत्काल प्रभाव से रोका जाना जरूरी हो गया है।



