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बदलता हवा का रुख

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अभी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भले ही सात—आठ माह का समय शेष हो लेकिन सूबे के सियासी दलों ने चुनावी शंखनाद शुरू कर दिया है। बीते दिन दिल्ली में भाजपा के कुछ पूर्व विधायक और मेयर सहित आधा दर्जन बड़े तथा प्रभावी नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। प्रदेश प्रभारी कुमारी श्ौलजा ने कांग्रेस में अपनी निष्ठा जताने वाले भाजपा और पूर्व भाजपा नेताओं का स्वागत किया तो नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने इसे सियासी बदलाव का संकेत बताया। रुद्रपुर से दो बार विधायक रहे राजकुमार ठुकराल का कहना है कि वह कांग्रेस के लिए समर्पित रहेंगे। टिकट मिलने के सवाल पर उनका कहना है कि इतिहास रचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में चुनाव पूर्व भाजपा नेताओं के कांग्रेस के साथ जाने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ का कहना है कि यह भाजपा का निकाला हुआ माल है, कहीं न कहीं तो जाएगा ही। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस अवसर पर कहा कि उनके पास लंबी सूची है अभी सिर्फ 6 लोग ही फाइनल हुए हैं बाकी आने वाले समय में कांग्रेस की सदस्यता लेने वाले बहुत है। इन तमाम नेताओं के बयानों के बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने 15 दिन के अर्जित अवकाश पर रहने की जो घोषणा की है उसके भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। दिल्ली के कार्यक्रम से उन्हें दूर रखना उनकी नाराजगी की वजह हो सकता है। इन तमाम घटनकर्मो और बयानों से एक बात तो साफ है कि प्रदेश की सियासी हवा तेजी से रुख बदल रही है। बीते कुछ सालों से कांग्रेस को छोड़कर भाजपा की ओर दौड़ने वाले नेताओं को भी अब लगने लगा है कि समय करवट बदल रहा है। राजनीति का हमेशा ही यह मिजाज रहा है की हवा के रूख के साथ नेता अपना पाला बदल देते हैं। कांग्रेस को लेकर अब भाजपा ही नहीं अन्य नेताओं में भी यह सोच मजबूत होती जा रही है कि कांग्रेस मजबूत होती जा रही है। आज यशपाल आर्य ने एक बात अपने संबोधन में कही थी भाजपा के अहंकारी रवैये से लोग अब परेशान आ चुके हैं। डबल और ट्रिपल इंजन की सरकारों का झांसा देकर सत्ता पर काबिज रहने वाली भाजपा ने जनता से जो वायदे किए थे उन्हें भाजपा ने कितना पूरा किया है इस बात को अब लोग समझ चुके हैं। महेंद्र भटृ का कांग्रेस में जाने वाले नेताओं को निकाला हुआ माल बताया जाना भी भाजपा के अहंकार को ही पोषित और प्रमाणित करने वाला बयान है। अभी बीते दिनों बजट सत्र के दौरान अंकिता भंडारी हत्याकांड के बारे में सदन में चर्चा के दौरान सुबोध उनियाल ने ऐरा—गैरा नत्थू गैरा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर भारी हंगामा हुआ था। जहां तक कांग्रेस की बात है इस बार वह चुनाव में किसी तरह की ढील देने को तैयार नहीं है यही कारण है कि उसने अभी से अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। महेंद्र भटृ के बयान को लेकर भाजपा नेताओं में चर्चाओं का दौर जारी है क्योंकि इन नेताओं को निकाला गया माल कहा जाना किसी को भी नागवार ही लगेगा। लेकिन भाजपा नेताओं की अहंकारी भाषा श्ौली का क्या कीजिएगा। राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल, भीमलाल आर्य, लखन सिंह नेगी तथा गौरव गोयल का कांग्रेस के साथ जाना कितना लाभकारी रहेगा यह तो समय ही बताया कि अभी और कितने भाजपा नेता कांग्रेस में आते हैं इसके लिए इंतजार ही करना पड़ेगा?

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