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महाराज का तुगलकी बयान

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गैरसैंड में चल रहे बजट सत्र के दौरान एक तरफ यूकेडी जैसे दलो के नेता गैरसैण को राज्य की स्थाई राजधानी बनाने की मांग को लेकर जबरदस्त आंदोलन प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज पत्रकारों को बता रहे हैं कि पर्यटन विभाग भराड़ीसैंण में बनाए गए विधानसभा भवन को कॉरपोरेट मैरिज डेस्टीनेशन के रूप में विकसित करने की योजना बना रहे हैं उनका कहना है कि यह भव्य भवन आने वाले समय में एक वाइट एलीफेंट न बनकर रह जाए इसलिए वह चाहते हैं कि इसका उपयोग कॉरपोरेट जन मिलन (मीटिंग)और मैरिज डेस्टिनेशन के रूप में किया जाना चाहिए उनका तर्क है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उनके इस बयान को लेकर हंगामा होना अति स्वाभाविक है। उनके द्वारा दिया गया यह बयान सिर्फ इसलिए हैरान करने वाला व आपत्तिजनक नहीं है, उन्हें गैरसैण राजधानी के साथ जुड़े पहाड़ के लोगों की जन भावनाओं का भी ज्ञान नहीं है बल्कि इसलिए भी आश्चर्यजनक है उन्हें विधानसभा भवन की संवैधानिक महत्ता का भी बोध नहीं है। राज्य के विधान भवनों और संसद भवन को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है। जहां बैठकर देश और प्रदेश का नेतृत्व कर रहे माननीय नियम और कानून बनाने का कार्य करते हैं तथा जन राष्ट्रीय हित और समाज कल्याण पर चिंतन—मंथन और चर्चा की जाती है। भले ही सतपाल महाराज का राजनीतिक अनुभव कितना भी लंबा क्यों न हो लेकिन उनका यह बयान अत्यंत ही बचकाना और हास्यास्पद है? क्या सतपाल महाराज बता सकते हैं कि उन्होंने किसी अन्य राज्य में विधानसभा भवन को ऐसे बहुआयामी बनाने का उदाहरण देखा या सुना है? अगर नहीं तो फिर उनके दिमाग में ऐसा विचार भी कैसे आ गया। खास बात यह है कि यह कोई पहला मर्तबा नहीं है जब उन्होंने ऐसा बयान दिया हो, वह कभी टिहरी झील में पनडुब्बियों से पर्यटकों को जल मग्न हो चुकी टिहरी के दर्शन कराते हैं तो कभी घनसाली में पर्यटकों को दिन में तारे दिखाने का चमत्कारी बयान देकर सभी को सोचने पर विवश कर देते हैं कि क्या उनके पास ऐसा कोई चमत्कार है। कभी वह कहते हैं कि उत्तराखंड के लोगों को चार धाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों के पैर दबाने चाहिए तो कभी वह राज्य की नदियों में सी—प्लेन उतारने की बात कहते हैं। आज यह अहम सवाल है कि राज्य गठन से लेकर मंत्री पद पर आसीन रहने वाले सतपाल महाराज ने अपने कार्यकाल में पर्यटन को कितनी ऊंचाई तक पहुंचाया है? सच यह है कि पर्यटन राज्य का सबसे महत्वपूर्ण विभाग है एक समय में इस राज्य को पर्यटन राज्य के रूप में विकसित करने की बात चर्चाओं के केंद्र में रही है फिर भी राज्य का पर्यटन विभाग आज तक फिस्सडी है। अब रही बात विपक्ष से विरोध की तो जब सत्ता में बैठे मंत्री और विधायक इस तरह उटपटांग बयान देंगे या काम करेंगे तो विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिलना अति स्वाभाविक है। अभी भाजपा के विधायकों ने गैरसैंण में ऑक्सीजन की कमी बताते हुए यहां राजधानी के फैसले को ही गलत बता दिया गया था। गैरसैंण में बर्फ पड़ती है सर्दी होती है यहां क्या कोई अपने बाप को मरने के लिए भेज सकता है यह सब भाजपा नेताओं के बयान बताने के लिए काफी हैं कि गैरसैंण राजधानी को लेकर वह कितने संवेदनशील है।

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