उत्तराखण्ड में आपदा प्रबन्धन के कितने उचित इंतजाम है इसका पता टिहरी व देहरादून में 19 अगस्त की रात को आयी आपदा के बाद लगाया जा सकता है। यहंा आपदा के चार दिन बीत जाने के बावजूद दूरस्थ गांवों में अब तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। आपदा के बाद क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को ठीक करने की तो बात ही छोड़िये यहंा के गावों में अब तक पेयजल व बिजली संकट बना हुआ है। खाने पीने के सामान से लेकर दवाओं तक के कोई इंतजाम अब तक प्रशासन की ओर से नहीं किये जा सके है जिससे ग्रामीणों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आपदाग्रस्त क्षेत्र के लोग कई किलोमीटर जान जोखिम मेंं डालकर राशन के लिए पैदल बाजार तक पहुंच रहे है। ऐसा नहीं है कि शासन प्रशासन राहत कार्य सही ढंग से नहीं कर रहा है लेकिन वह इतना धीमी गति से है कि लोग अब आपदा प्रबन्धन पर ही सवाल उठाने लगे है। इस आपदा में आज भी तकरीबन 11 लोग लापता है और एसडीआरएफ एंव एनडीआरएफ उनकी तलाश में जुटी हुई है।
मानसूनी सीजन शुरू होने से पहले सरकार की ओर से आपदा प्रबन्धन को मजबूत करने के जो दावे किये गये थे उनका सच अब टिहरी व देहरादून में आयी आपदा के बाद सामने आ रहा है। सरकार व जिला प्रशासन को इस विषय में सोचने की जरूरत है कि जल्द से जल्द आपदा प्रभावितों को उचित मदद कैसे पहुंचायी जाये ताकि उन्हे कुछ राहत पहुंच सके।