भाजपा के उन चिंटुओं ने सितंबर 2022 में अंकिता भंडारी को चीला बैराज में डुबोकर मार डाला गया था, उन्होंने कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की होगी कि अंकिता भंडारी मरकर भी उनका पीछा नहीं छोड़ेगी तथा वह उनकी जिंदगी की पटकथा ही नहीं लिखेगी बल्कि राज्य की धामी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की तह तक की ऐसी कहानी लिखने वाली है जिसकी अनुगूंज न सिर्फ उत्तराखंड तक सुनाई देगी बल्कि देश और दुनिया में खबरों की एक ऐसी शुरुआत कर देगी जिसकी प्रचंड ज्वाला की आग में जलकर भाजपा के बड़े—बड़े सूरमाओं का राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा। उर्मिला सनावर ने अपने तमाम वीडियो और ऑडियो क्या जारी किए अब भाजपा के नेता न सिर्फ पार्टी से किनारा करने पर विवश हो रहे हैं बल्कि उर्मिला सनावर की धुआंधार बैटिंग के सामने एक पल भी नहीं टिक पा रहे हैं। इस बीच यह खबर भी आ चुकी है कि सनावर के ऑडियो—वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है जिनके एआई जनित होने की बात कही जा रही थी। भाजपा के नेताओं द्वारा भले ही प्रारंभिक दौर में उन्हें डराने धमकाने और उनके खिलाफ मुकदमे लिखने की बातें तो की जाती है लेकिन भाजपा का कोई भी नेता इसकी सीबीआई जांच कराने को तैयार नहीं है। देश और प्रदेश भर में इसे लेकर भाजपा के खिलाफ एक खतरनाक संदेश जा रहा है लेकिन भाजपा नेताओं के पास मौन रहने के अलावा इस बात का कोई जवाब नहीं है। सनावर के इस आडियो वीडियो से केंद्रीय संगठन मंत्री दुष्यंत गौतम से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक इस बड़े मामले को लेकर अत्यंत ही असहज और परेशान दिख रहे हैं। इस पूरे प्रकरण पर जब पार्टी के तमाम नेताओं द्वारा अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है तब सीएम धामी एकदम खामोशी ओढ़े हुए हैं। और उनकी नजरें सिर्फ और सिर्फ भाजपा हाई कमान पर ही लगी हुई है कि शायद वही कुछ फैसला ले सकते हैं दिल्ली से छन—छन कर कुछ ऐसी खबरें भी आ रही है कि बहुत ही कोई बड़ा एक्शन इस मामले में लिया जा सकता है। क्योंकि इस खबर से पार्टी के हित गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं अगर इसे डैमेज कंट्रोल न किया गया तो यह और भी अधिक विस्फोटक रूप धारण कर लेगा। असल में अंकिता भंडारी कांड से जुड़ा यह मुद्दा अब एक जनमुद्दे का रूप में प्रदेश के हर एक जिले और ब्लॉक तक पहुंच चुका हैं, इस मामले में देश की आधी आबादी की सुरक्षा का सवाल जुड़ा हुआ है महिलाओं में इसे लेकर इतनी अधिक नाराजगी दिख रही है कि वह हाथों में घास काटने वाली दरांती लेकर धरने प्रदर्शनों तक आ रही है और नेताओं के आचरण को लेकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर है। खास बात यह है कि अब भाजपा के तमाम नेताओं का भी यही मानना है कि इस मामले को अब सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार किए जाने से ही कोई बात बनती नहीं दिख रही है। उधर कयास यह भी लगाये जा रहे हैं कि उर्मिला सनावर को भी बात करने और समझाने के प्रयास भी हो रहे हैं। लेकिन भाजपा नेताओं को अभी इसकी पूरी जानकारी तक नहीं है कि इस डेंट की कीमत कितनी बड़ी चुकानी पड़ सकती है। कांग्रेस और विपक्ष के नेता भले ही अब यह नहीं कह रहे हैं कि वह कोई आरोप लगा रहे हैं। उनका साफ कहना है कि भाजपा के नेता ही जब सवाल उठा रहे हैं तो क्या जांच नहीं होनी चाहिए। भाजपा और धामी को इस पूरे प्रकरण का कई स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। जो उनके तथा पार्टी के स्तर पर काफी चिंतनीय बात है लेकिन अभी अहम सवाल यह है कि अब इसका पटाक्षेप होगा तो होगा कैसे?




