- केंद्र व धामी सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
- 5 दिन बाद भी लापता व मृतकों की सूची जारी नहीं
- प्रभावितों ने 5—5 हजार की मदद को नकारा
उत्तरकाशी। धराली आपदा जिसको 2013 की केदारनाथ आपदा जैसा ही बताया जा रहा है, का सच क्या छुपाया जा रहा है? सरकार द्वारा 5 दिन बाद भी मृतकों और लापता लोगों की सही जानकारी क्यों नहीं दी जा सकी है? तथा आपदा प्रभावितों तक कितनी मदद पहुंचाई जा सकी है? आदि—आदि कुछ ऐसे सवाल हैं जिन्हें लेकर प्रभावितों का आक्रोश और गुस्सा तो फूट ही रहा है अब इसे लेकर स्थानीय लोग केंद्र की मोदी और सूबे की धामी सरकार को ट्टघाम तापने’ की नसीहतें दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ ऑडियो और वीडियो धराली आपदा प्रवाहितों के दर्द और 5 दिनों में किए गए बचाव व राहत कार्यों से इस कदर नाराज है कि उन्होंने धराली प्रभावितों को प्रशासन द्वारा बांटे जाने वाले पांच—पांच हजार के चेक लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि 5 दिनों से वह भूखे प्यासे हैं और अंधेरे में अपने बच्चों के साथ रातें गुजार रहे हैं। आसमान में हेलीकॉप्टर और चिनूक तो उड़ रहे हैं लेकिन उनके पास मोमबत्ती और खाना पहुंचाने में सरकार व प्रशासन को 5 दिन का समय लग गया। क्षेत्र वासियों का कहना है कि वह जंगल में रह रहे हैं और उन्हें इधर—उधर रखा जा रहा है जिससे कि उन्हें सही स्थिति का भी पता नहीं चल पा रहा है कि उनके कितने लोग कहां हैं तथा किस हाल में है। प्रशासन द्वारा सहायता राशि के पांच—पांच हजार के चेक लेने का भी सामूहिक रूप से उनके द्वारा बहिष्कार कर दिया गया और धामी सरकार तथा मोदी सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की गई तथा उनके द्वारा ट्टघाम तापने’ के नारे भी लगाये जा रहे हैं।
उधर एक ऑडियो में एक महिला जो अपने आप को भाजपा की पदाधिकारी बता रही है बॉबी पवार को बताती है कि सरकार आपदा का सच छुपाने की कोशिश कर रही है। उनकी सीएम के साथ हुई वार्ता में उनकी आवाज को नहीं सुना जा रहा है। आपदा में कितने लोग मारे गये हैं कितने लापता है इसकी कोई जानकारी किसी को नहीं दी गई है। उन्होंने मीडिया पर सरकार के अनुरूप काम करने का आरोप लगाया है। शासन का पूरा फोकस वैली ब्रिज व सड़कों को ठीक करने पर लगा है आपदा में मरने व लापता लोगों पर नहीं है। उधर लापता लोगों के परिजन भी अपनों की तलाश में है उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।




