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देवभूमि में ‘आस्था’ पर ‘सियासत’

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  • राजधानी में एक ही दिन में दो मुख्यालयों में घंटों चला ‘सियासी महाभारत’
  • भाजपा ने कहा- सत्य सामने आएगा, कांग्रेस बोली चोरी नहीं, सिस्टम की मिलीभगत
  • बदरीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे पर आमने-सामने आए भाजपा-कांग्रेस

देहरादून। बदरीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला अब केवल जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा सियासी हथियार बनता जा रहा है। राजधानी देहरादून में महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित भाजपा और कांग्रेस मुख्यालयों में हुई दो अलग-अलग पत्रकार वार्ताओं ने यह साफ कर दिया कि देवभूमि की आस्था अब राजनीतिक अखाड़े के केंद्र में आ चुकी है।एक ओर भाजपा प्रदेश मुख्यालय में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी मीडिया के सामने आए और आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि जांच चल रही है और सच सामने आएगा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार और बीकेटीसी पर तीखा हमला बोलते हुए पूरे प्रकरण को प्रशासनिक विफलता और जवाबदेही के संकट का प्रतीक बताया।
भाजपा की प्रेस वार्ता का मूल संदेश था कि सरकार ने मामले को दबाने के बजाय जांच कराई, आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पार्टी ने विपक्ष पर आस्था के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। इसके कुछ ही समय बाद कांग्रेस ने उसी मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया। गणेश गोदियाल ने सवाल उठाया कि यदि व्यवस्थाएं इतनी मजबूत थीं तो आखिर चढ़ावे की चोरी हुई कैसे? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर देने से जवाबदेही पूरी हो जाती है, या शीर्ष स्तर पर भी नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में कथित चोरी की घटना स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। लेकिन जिस तरह दोनों प्रमुख दल इसे अपने-अपने राजनीतिक नैरेटिव के अनुरूप पेश कर रहे हैं, उससे यह मामला अब धार्मिक भावना से आगे बढ़कर चुनावी विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की पारदर्शिता बनाम विपक्ष की राजनीति के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे भ्रष्ट व्यवस्था और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों की रणनीति स्पष्ट दिखने लगी है। कांग्रेस सरकार की साख पर सवाल खड़े करने के लिए बदरीनाथ प्रकरण को लगातार उठाना चाहती है। वहीं भाजपा यह संदेश देने में जुटी है कि उसने मामले में कार्रवाई कर यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार पर उसकी नीति जीरो टालरेंस की है। यानी यह लड़ाई केवल एक चोरी की नहीं, बल्कि विश्वास बनाम जवाबदेही की राजनीतिक लड़ाई बनती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या बदरीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थल से जुड़ा मामला निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तक सीमित रहेगा, या फिर 2027 के चुनाव तक यह भाजपा और कांग्रेस के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा?
फिलहाल तस्वीर यही है कि एक मुख्यालय से सफाई दी जा रही है, दूसरे मुख्यालय से सवाल दागे जा रहे हैं। बीच में खड़ी है देवभूमि की जनता, जो यह जानना चाहती है कि आखिर चढ़ावे की सुरक्षा में चूक कैसे हुई, जिम्मेदार कौन है, और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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