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विज्ञापनों की भरमार से दून का हाल—बेहाल

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  • इंडिकेटर बोर्डाे तक पर विज्ञापनों का कब्जा
  • कानून उल्लघन में नेताओं ने तोड़े रेकॉर्ड

देहरादून। स्वच्छ दून—सुंदर दून उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लोगों को सुकून और शांति का एहसास कराने वाला यह स्लोगन अब बीते दिनों का किस्सा हो चुका है। आज के वर्तमान का देहरादून अब न तो स्वच्छ रहा है और न ही सुंदर। साफ—सफाई व सड़कों के हालात, धूल और धुएं से दूनं के हालात क्या है यह किसी से भी छिपा नहीं है। इसके ऊपर से बैनर—पोस्टरों और होर्डिंग की भरमार ने शहर की सूरत को इस कदर बिगाड़ दिया है कि इसे देखकर किसी भी कस्बाई शहर की याद ताजा हो जाती है।
राजधानी की कोई भी सड़क, बिजली के खंभे, दीवारें छतें और तो और नगर निगम द्वारा शहर में लगाए गए इंडिकेटिंग बोर्डो जो बाहर से आने वालो को रास्ता सुझाने का काम करते हैं उन पर भी दीवाली की शुभकामनाओं और दीवाली धमाका के ऑफरों के प्रचार पोस्टरो ने कब्जा जमा लिया है। हर कदम में लगे यह प्रचार—पोस्टरों और बैनर सरकार की विज्ञापन नीतियों का उपहास उड़ाते दिख रहे हैं। शहर की कोई भी सड़क, चौराहा और गली मोहल्ला इससे अछूता नहीं है। तथा यह विज्ञापन देखकर ऐसा एहसास होता है कि जैसे किसी कपड़े पर जगह—जगह पाबंद लगे हो।
खास बात यह है कि इन विज्ञापनों व पोस्टरों में बड़ी कंपनियों को भी सेल धमाका और मिठाई पटाखे वालों ने पीछे छोड़ दिया है। खास बात यह है कि इस मामले में हमारे माननीय मंत्री, विधायक और सांसदों ने तो जो रिकॉर्ड तोड़े हैं वह तोड़े ही है, छूट भ्ौय्या नेताओं ने भी अपनी पार्टी के दिग्गज नेताओं की चापलूसी करते हुए अपने बैनर पोस्टरों पर उनके नाम का लाभ उठाने वाले बैनर पोस्टर लगाने में कोई कोर कसर उठाकर नहीं छोड़ी। नगर निगम जिसके पास इन बैनर पोस्टरों को हटाने और लगाने की जिम्मेदारी है। वह इन पोस्टरों और विज्ञापनों को कब तक नजर अंदाज करेगा। मुश्किल यह है कि जिनके द्वारा पूरे शहर को इस बदहाल स्थिति में पहुंचाया गया वह भी तो सब अपने ही हैं। फिर किसके पोस्टर कैसे हटार्ये जाए। इसमें थोड़ी दिक्कत तो है ही। देखते हैं कि नगर निगम प्रशासन का उनकी तरफ कब ध्यान जाता है और कब इसे हटाया जाता है। फिलहाल तो इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि हम किसी नुमाइश में घूम रहे हैं। सड़कों को पाट चुके यह विज्ञापन लोगों को हादसे का शिकार भी बना रहे हैं जिनसे सड़कों पर चलते समय वाहनं चालकों का ध्यान इधर—उधर भटक जाता है और वह दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

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