Home उत्तराखंड देहरादून जातीय जनगणना का फैसला

जातीय जनगणना का फैसला

0
527


जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में पूरे देश के लोग सरकार की उस जवाबी कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं जिसे लेकर प्रधानमंत्री हमला करने वालो और हमलावरों की मदद करने वालों तथा इसका षड्यंत्र रचने वालों को किसी भी कीमत पर न बख्शने की बात कह रहे हैं। तथा इसे राष्ट्रीय संकल्प बता रहे हैं। एक सप्ताह से दिल्ली में ताबड़तोड़ हो रही हाई लेवल बैठकों से भी यही लग रहा था। कल कैबिनेट की जो बैठक हुई उसके बाद भी यही सोचा जा रहा था कि सरकार इस पर कोई बड़ा फैसला लेगी लेकिन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री इसकी जानकारी देने के लिए मीडिया के सामने आए तो उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस बैठक में सरकार द्वारा देश में जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे सरकार का ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि इससे पिछड़े वर्ग के लोगों को मुख्य राष्ट्रीय धारा से जोड़ा जा सकेगा तथा उनके उत्थान का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार द्वारा किए गए इस फैसले ने चौंका दिया है। लोगों के चौकंने का कारण यह है कि यह मुद्दा तों विपक्ष कांग्रेस और राहुल गांधी का सबसे प्रमुख मुद्दा था। बड़ी सीधी सी बात है कि जब विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की नाक में दम कर रखा था तो सरकार विपक्ष की मांग को भला इतनी आसानी से मानने पर विवश कैसे हो गई। सरकार अच्छे से जानती है कि विपक्ष इसका विरोध तो कतई भी नहीं कर सकता है। क्योंकि यह उसी की मांग थी। विपक्ष द्वारा सरकार के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत तो किया जा रहा है साथ ही सरकार को सहयोग देने की बात भी की जा रही है और यह भी कहा जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला विपक्ष के सशक्त रवैये के दबाव में लिया है। जो एक बहुत बड़ा सच भी है। भले ही इसका फैसला मोदी सरकार ने किया हो लेकिन इसका श्रेय राहुल गांधी को ही जाता है जो 100 बार यह बात कह चुके हैं जब भी उनकी सरकार आएगी वह पहले काम जातीय जनगणना का ही करेंगे तथा आरक्षण की 50 प्रतिशत की दीवार को गिराने का काम करेंगे। राहुल गांधी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करने के साथ सरकार के सामने एक मांग भी रखी है कि उसे जातीय जनगणना की समय सीमा भी तय करनी चाहिए। उनकी इस मांग के पीछे जो कारण है उसे आप सरकार द्वारा नई संसद में लाये जाने वाले महिला आरक्षण बिल से भी समझ सकते हैं जिसे संसद ने पास तो कर दिया लेकिन वह लाभ कब होगा इसकी अभी तक कोई समय सीमा तय नहीं हो पाई है। तब यह सवाल स्वाभाविक ही है कि क्या सरकार ने कैबिनेट में यह फैसला बिहार तथा इसके बाद होने वाले चुनावों में नुकसान से बचने के लिए लिया है। शायद यही सच भी है। यह अलग बात है कि इस पर आ रही प्रतिक्रियाओं में लोगों द्वारा इसे विपक्ष का मुद्दा छीन लेना बताया जा रहा हो या फिर मोदी का मास्टर स्ट्रोक अथवा विपक्ष के सामने झुकना। लेकिन फिलहाल यह फैसला सिर्फ चुनावी राजनीति से प्रेरित होने के अलावा कुछ भी नहीं है क्योंकि पीएम मोदी और भाजपा के नेता जातीय जनगणना को कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति बता कर बटोगे तो कटोगे जैसे नारों से अपने वोट बैंक को बचाने की कोशिश करते हैं। इसलिए सत्ता का यह हृदय परिवर्तन किसी की भी समझ में नहीं आ रहा है। लेकिन सरकार का यह फैसला यह जरूर बताता है कि विपक्ष का मजबूत होना सरकार की मनमानी पर अंकुश लगाने में जरूर कामयाब हो रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है इसलिए इसे मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास भी समझा जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here