- जोहड़ी-जाखन में अतिक्रमण पर हंगामा
देहरादून। उत्तराखंड के मुखिया पुष्कर सिंह धामी अपनी तमाम बड़ी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए जमीनों की अवैध खरीद—फरोख्त तथा जमीनों से अवैध कब्जे हटाने को बड़ी उपलब्धि बताते हैं। राज्य की डेमोग्राफी चेंज के मुद्दे पर अपनी सख्ती का जिक्र करते हुए वह यह बताना कभी नहीं भूलते हैं कि उनके कार्यकाल में 12000 हेक्टेयर जमीन को अब तक कब्जा मुक्त कराया गया है। लेकिन राजधानी दून के जंगलों को जिस तरह भूमाफिया उजाड़ रहे हैं और जंगलों को खोखला कर अवैध निर्माण कर रहे हैं उसे कब रोका जाएगा और कैसे रोका जाएगा? इस पर शासन कब सख्ती दिखाएगा वह बोलने को तैयार नहीं है।
अभी बीते दिनों तपोवन के खलंगा क्षेत्र के जंगलों में अवैध पेड़ कटान और जमीन कब्जाने का एक बड़ा मामला सामने आया जिसे स्थानीय लोगों के विरोध के बाद रोका जा सका था। ठीक वैसा ही एक मामला जोहड़ी गांव के जंगल में भी सामने आया है जहां न सिर्फ सैकड़ो पेड़ों का अवैध कटान हो चुका है बल्कि विघुत लाइन बिछाने का भी प्रयास किया गया। स्थानीय लोग अगर इसका विरोध न करते तो न वन विभाग कुछ करने वाला था न शासन प्रशासन। लोग चिल्ला—चिल्ला कर कह रहे हैं कि शासन—प्रशासन की मिली भगत के बिना यह सब संभव नहीं है।

खास बात यह है कि दून के इर्द—गिर्द जो भी संरक्षित वन क्षेत्र है उसमें व्यापक स्तर पर जंगलात की जमीनों पर अवैध कब्जों का यह खेल जारी है। राजपुर क्षेत्र में जितने भी ग्रामीण क्षेत्र हैं वह चाहे जोहड़ी गांव हो बिष्ट गांव या चंद्रोटी सिनोला, पुरकल, किमाड़ी सहित तमाम क्षेत्रों में अवैध भूमि पर कब्जो का खेल जारी है। रायपुर और मालदेवता क्षेत्र से सहस्त्रधारा क्षेत्र तक दून का कोई कोना इससे अछूता नहीं है। कालनेमियों और धार्मिक स्थलों की आड़ में जमीन कब्जाने वालों पर तो सरकार की नजर है लेकिन जंगलात की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों पर शासन का मौन हैरान करने वाला है। हंगामे के बाद जंगलात के अधिकारियों व शासन—प्रशासन का जागना संदेहास्पद है ऐसा लगता है कि इस खेल में सभी की मौन सहमति है।
क्षेत्रवासियों ने सौंपा डीएम को ज्ञापन
देहरादून। नगर निगम वार्ड—2 (विजयपुर) के तहत जोहड़ी—जाखन के आरक्षित जंगल में अवैध कब्जे का मामला गरमा गया है। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग जंगल की जमीन पर कब्जा जमाने के लिए बिजली के खंभे गाड़कर लाइन बिछा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग को लिखित शिकायत, फोटो और वीडियो सबूत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं जंगल में पेड़ों के कटने की आशंका भी जताई जा रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तुरंत हस्तक्षेप कर अवैध निर्माण हटाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।




