- रेखा आर्य के आरोपों से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल
- पति से जान का खतरा बताकर भावुक हो गई कैबिनेट मंत्री
- थाने में शिकायत और अस्पताल में भर्ती होने से बढ़ी गंभीरता
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में महिला सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मामला किसी आम महिला का नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य का है। मंत्री ने सोशल मीडिया पर भावुक वीडियो जारी कर अपने पति गिरधारी लाल साहू से जान का खतरा होने की आशंका जताई है। उन्होंने पुलिस से शिकायत किए जाने की बात भी सामने रखी है। वीडियो जारी होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी ने इस प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
मामले ने प्रदेश की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला सुरक्षा, घरेलू संबंधों में उत्पन्न विवाद और सत्ता में महिलाओं की स्थिति को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी आवश्यक है। ऐसे में आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी। सामने आई जानकारी के अनुसार, रेखा आर्य ने देहरादून के कैंट थाने में शिकायत देकर अपने पति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में उन्होंने कथित रूप से अन्य महिलाओं से संबंध होने के आरोप लगाए हैं। साथ ही, एक कथित ध्वनि रिकॉर्डिंग का उल्लेख करते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं व्यक्त की हैं।
इन आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ गई है। शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, क्या प्राथमिकी दर्ज की गई है और कथित ध्वनि रिकॉर्डिंग की सत्यता की जांच किस स्तर पर है। इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है। मंत्री की सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को गंभीरता से लेते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इस प्रकरण का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि रेखा आर्य स्वयं महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री हैं। उनके विभाग की जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों के कल्याण, संरक्षण तथा अधिकारों से जुड़े विषयों से भी संबंधित है। ऐसे में उनके द्वारा अपनी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताना स्वाभाविक रूप से व्यापक चर्चा का विषय बनेगा।
विपक्ष के लिए यह मामला सरकार को घेरने का मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल सरकार से पूछ सकते हैं कि जब प्रदेश की एक कैबिनेट मंत्री को ही अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस के पास जाना पड़ रहा है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार कितनी गंभीर है? हालांकि, किसी एक मामले के आधार पर पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन शिकायत की गंभीरता सरकार और पुलिस की जवाबदेही अवश्य बढ़ाती है।
इस घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है। सार्वजनिक जीवन में प्रभावशाली पद पर पहुंचने वाली महिलाओं को अक्सर राजनीतिक विरोध, सामाजिक अपेक्षाओं और निजी जीवन की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन किसी महिला की सुरक्षा का सवाल उसके पद, प्रतिष्ठा या राजनीतिक प्रभाव से तय नहीं होना चाहिए। यदि मंत्री ने वास्तव में अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस किया है, तो उनकी शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मामले की जांच राजनीतिक दबाव या सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित न हो। कानून की नजर में हर नागरिक समान है और किसी भी शिकायत का निस्तारण साक्ष्यों तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
रेखा आर्य के आरोपों से भाजपा सरकार के सामने भी असहज स्थिति पैदा हो सकती है। महिला सशक्तीकरण और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियों तथा दावों पर राजनीतिक बहस होना स्वाभाविक है। विपक्ष इस प्रकरण को सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर के रूप में प्रस्तुत कर सकता है। लेकिन इस मामले को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित कर देना भी उचित नहीं होगा। यदि शिकायत में सुरक्षा संबंधी वास्तविक खतरे की बात कही गई है, तो पहली प्राथमिकता मंत्री की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराना होना चाहिए। इसके बाद ही तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
रेखा आर्य के भावुक वीडियो, थाने में शिकायत और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी के बाद अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर हैं। क्या मंत्री की सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का आकलन किया गया है? क्या शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई है? कथित ध्वनि रिकॉर्डिंग की जांच में क्या सामने आया है? इन सवालों का जवाब मामले की आगे की दिशा तय करेगा। फिलहाल, यह प्रकरण केवल एक मंत्री के निजी जीवन से जुड़ा विवाद नहीं रह गया है। इसने महिला सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और सत्ता में महिलाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन इतना तय है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही सरकार और पुलिस दोनों के लिए सवाल खड़े कर सकती है।





