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बच्ची चोरी मामले का खुलासा, पति—पत्नी सहित तीन गिरफ्तार

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हरिद्वार। बच्ची चोरी मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने पति—पत्नी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनके पास से चुरायी गयी बच्च्ी भी बरामद की गयी है। आरोपियो ने लड़का बेचने की फिराक में गलती से बच्ची चोरी की घटना को अंजाम दिया था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने बताया कि बीती 28 मई को पुष्पेन्द्र निवासी सम्भल उत्तर प्रदेश द्वारा चौकी रोडिबेलवाल में आकर सूचना दी गई कि 27 माई को गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आने के बाद उनका परिवार रात को हाथी पूल के निकट विष्णु घाट में एक पेड़ के नीचे सो गया। सुबह उठने पर उन्हे अपनी 4 महीने की बेटी गायब मिली। आसपास काफी तलाशने के बाद भी बच्ची का कोई पता नही चल पाया। बच्ची चोरी से जुड़े इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी। बच्ची के चोरी होने का सही समय पता न होने के चलते पुलिस टीम ने अनुमानित समय सीमा के बीच की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाते हुए एक संदिग्ध जोड़े की पड़ताल शुरु की। संदिग्ध जोड़ा पहले दिनाँक 27 मई को एक बच्चे को साथ लेकर विष्णु घाट पर घूमते हुए और फिर दिनांक 28 मई की सुबह 2 बच्चों के साथ उ0प्र0 परिवहन निगम की बस में बैठेते हुए दिखे। बस के चालक/परिचालक से पूछताछ व अन्य पड़ताल से सामने आया कि ये जोड़ा धामपुर में बस से उतरा और फिर हावड़ा जाने वाली ट्रेन में बैठ गए। धामपुर से हावड़ा(प0बंगाल) के मध्य ट्रेन के 65 स्टेशन होने के कारण सभी स्टेशनों से जानकारी जुटाई गई लेकिन कोई भी लाभप्रद सूचना नहीं मिल पायी।
तलाश का एंगल बदलते हुए पुलिस ने उक्त संदिग्ध जोड़े के विष्णु घाट तक आने के रूट की जांच की, जिसमें ये जोड़ा 27 मई को शिवालिक नगर क्षेत्र के ब्रह्मपुरी से आते हुये दिखाई दिये। उक्त संदिग्ध महिला—पुरुष की फोटो दिखाकर आस पास पूछताछ की गयी तो प्रकाश में आया कि वह दोनों अपने बच्चे सहित झाड फूंक का काम कर रहे एक बाबा की ब्रह्मपुरी क्षेत्र में बनी हुई झोपडी में रह रहे थे। लीड मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत झोपडी में दबिश देकर संदिग्ध बाबा सत्यपाल और तलाशे जा रहे महिला और पुरुष को बच्ची सहित पकड़ लिया। मिलान करने पर उक्त बच्ची वहीं 4 माह की बच्ची निकली जिसका अपहरण किया गया था। संदिग्ध जोड़े ने पूछताछ करने पर बताया कि वह आपस में पति—पत्नी हैं और चार बच्चों के माता—पिता हैं जिनमें तीन लड़के और एक लड़की शामिल है। कुछ समय पहले महिला के चचेरे भाई ने उसे बताया था कि 5 लड़कियां पैदा होने के बाद एक दंपत्ति को बेटे की जरुरुत है। अगर वह अपना एक बेटा दे दे तो बदले में तीन लाख रुपये मिलेंगे। महिला ने अपना बच्चा देने से मना कर दिया लेकिन बड़ी रकम के लालच में उसने यह बात अपने परिचित सत्यपाल (बाबा) को बतायी। हरिद्वार में लाखों लोगों की भीड़ में घाटों से बच्चे चुराने की सत्यपाल की सलाह पर ही दंपत्ति अपनी छोटी बच्ची को साथ लेकर 26 मई को इटावा व लखनऊ से होते हुये ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे थे। एक दिन व रात सत्यापाल की झोपड़ी में रुकने के बाद दिनांक 27 मई को छोटी बेटी को साथ लेकर हरिद्वार घाट मे गये और बच्चे चोरी करने का मौका तलाशने लगे। अगली सुबह 4 बजे के लगभग उन्होंने गहरी नींद मे सो रहे एक परिवार के बीच से उस बच्ची को गलती से लडका समझकर चोरी कर लिया था। चुराए गए बच्चे की लड़की होने की बात पता चलने पर दंपत्ति सत्यपाल के कहने पर अपने घर जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे लेकिन ट्रेन न मिलने पर बस मे धामपुर गये और वहां से ट्रेन में बैठकर लखनऊ तथा उसके बाद अपने गांव नगरिया चले गये। अपनी बच्ची को घर छोड़कर दंपत्ति सत्यपाल के कहने पर चुराई गई बच्ची को किसी और को बेचने के इरादे से हरिद्वार सत्यपाल की झोपड़ी पर पहुंचे और पकड़े गए।

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