- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धांजलि
- द्रोणाचार्य पुरस्कार सहित कई सम्मान रहे राणा के नाम
देहरादून। भारतीय निशानेबाजी जगत को बड़ा झटका लगा, जब देश के महानतम पिस्टल निशानेबाजों और कोचों में शुमार जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया।ा द्रेणाचार्य सहित कई सम्मान जसपाल राणा के नाम रहे।
आज यहां भारतीय निशानेबाजी जगत को बड़ा झटका लगा, जब देश के महानतम पिस्टल निशानेबाजों और कोचों में शुमार जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। हाल ही में म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी थी। दिल्ली में उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर है। 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में निशानेबाजी में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके पिता नारायण सिंह राणा स्वयं शूटिंग से जुड़े रहे और जसपाल के पहले कोच बने। बचपन से ही अनुशासन, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति समर्पण उनकी पहचान बन गए। जसपाल राणा ने 1994 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। उसी वर्ष मात्र 18 वर्ष की उम्र में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बाद में 1997 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में दर्जनों पदक जीते। उनके नाम राष्ट्रमंडल खेलों में 15 पदक दर्ज हैं, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2006 एशियाई खेलों में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। एक प्रतियोगिता में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की थी। प्रतिस्पर्धी शूटिंग से आगे बढ़कर जसपाल राणा ने खुद को एक सफल कोच के रूप में स्थापित किया। उन्होंने भारत की नई पीढ़ी के निशानेबाजों को तैयार किया और मानसिक मजबूती को प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना। उनकी कोचिंग में भारतीय शूटिंग ने नई ऊंचाइयों को छुआ। विशेष रूप से भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे जसपाल राणा की मेहनत और मार्गदर्शन को व्यापक रूप से सराहा गया। खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने में उनके योगदान के लिए उन्हें 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके कोचिंग करियर की सर्वाेच्च उपलब्धियों में से एक था। जसपाल राणा केवल भारत ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की भी शान थे। 2025 में उन्हें उत्तराखंड गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने हमेशा पहाड़ के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी या कोच का निधन नहीं है, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक युग का अंत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित देशभर के खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। निशाने पर उनकी पकड़ इतनी सटीक थी कि दुनिया ने उन्हें चैंपियन कहा, और खिलाड़ियों के मन को पढ़ने की कला इतनी गहरी थी कि भारत ने उन्हें गुरु माना। जसपाल राणा चले गए, लेकिन भारतीय शूटिंग के इतिहास में उनका नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पद्मश्री से सम्मानित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज श्री जसपाल राणा के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, कठिन परिश्रम और उल्लेखनीय उपलब्धियों से न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। निशानेबाजी के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को प्रेरित कर खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जसपाल राणा का निधन खेल जगत, उत्तराखंड तथा राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की ईश्वर से कामना है।




