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अतिक्रमण की मारः जंगल में मंगल

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  • प्रशासन की बुलडोजर कार्यवाही जारी
  • शासन—प्रशासन पर अतिक्रमण भारी

देहरादून। उत्तराखंड राज्य में नालों खालो और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के साथ—साथ जंगलात की जमीनों पर भी व्यापक स्तर पर कब्जे किए जाने का सिलसिला लगातार जारी है। भले ही राज्य की धामी सरकार किसी भी तरह के अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुटी हो लेकिन भू—माफिया और अतिक्रमणकारी अपने अभियान में जुटे हुए हैं।
मसूरी जाने वाले मार्ग पर दून से लेकर मसूरी तक जंगलात की जमीनों पर होते अवैध निर्माण इसकी गवाही देते दिखते हैं। दून से मसूरी जाने के लिए मैगी प्वाइंट जो युवाओं की मौज मस्ती के लिए मशहूर है, के आसपास जंगल के अंदर तमाम निर्माण कार्य हो रहे हैं। फोटो में दिख रही यह बिल्डिंग अगर एक दो मंजिल की होती तो घने जंगल में यह किसी को भी नजर तक नहीं आती, लेकिन सीमेंट के ऊंचे ऊंचे पिलरों के सहारे खड़ी की गई यह कई मंजिल ऊंची इमारत को देखकर कोई भी हैरान हो सकता है और सोच सकता है क्या एमडीडीए ने यहां भवन निर्माण की इजाजत दी होगी।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ पूरे राज्य में इन दिनों विशेष अभियान चलाया जा रहा है। राजधानी दून और जनपद के कई हिस्सो में इन दोनों अवैध कब्जोंं पर बुलडोजर की कार्यवाही जारी है। अभी बीते दिनों रायपुर क्षेत्र के जंगलों में भी खलंगा के आस पास जंगल में न सिर्फ अवैध निर्माण का मामला सामने आया था बल्कि अवैध रूप से सड़क निर्माण की कोशिशों को भी नागरिकों की जागरूकता से रोका गया था। डाकरा बाजार में क्षेत्र और पछुवा दून क्षेत्र में 54 अवैध निर्माण नगर निगम द्वारा ध्वस्त किए गए थे। विकासनगर में एमडीडीए द्वारा कई बीघे जमीन से अवैध कब्जे हटाए गए थे। ऋषिकेश और मसूरी में भी तमाम अवैध निर्माणों को सील किया गया है। शासन प्रशासन के स्तर पर अवैध अतिक्रमण पर कार्यवाही के बीच भी अवैध निर्माण जारी है। जबकि सेक्टर मजिस्ट्रेट द्वारा निगरानी का काम किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तो की ही जा रही है तथा उन्हें चेतावनी भी देकर छोड़ा जा रहा है। लेकिन अतिक्रमण लगातार जारी है जो कार्यवाही पर प्रश्न चिह्न भी लगाता है।

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