भाजपा नेताओं ने बीते एक दशक में देश की राजनीति के चित्र और चरित्र को पूरी तरह से बदल डाला है। पार्टी द्वारा जिस तरह से आए दिन नए-नए प्रयोग किए जाते हैं वह अत्यंत ही चौंकाने वाले होते है। कुछ प्रयोग तो इतने हास्यास्पद भी होते हैं कि लोग यह सोचने पर विवश हो जाते हैं कि आखिर इस तरह के आइडिया किसके द्वारा सुझाए जाते हैं। भाजपा शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों को बदले जाने की एक रवायत बन चुकी है। किसी भी मुख्यमंत्री को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले पद से हटाया जाना और किसी अन्य चेहरे को सीएम की कुर्सी पर बैठाने का प्रयोग अब पुराना हो चुका है। कई बार तो चुनावी साल में एक के बाद एक कई चेहरे भी बदले जाने का काम बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व कर चुका है जिसका एक उदाहरण उत्तराखंड भी है। जब त्रिवेंद्र सिंह को सीएम के पद से हटाकर तीरथ सिंह रावत और कुछ दिनों में उन्हें भी हटाकर पुष्कर सिंह धामी को चुनाव से ऐन पूर्व समय में मुख्यमंत्री बनाया गया था। इससे पूर्व भी हमने देखा था जब बीसी खंडूरी को पद से हटाकर डॉ निशंक और निशंक को हटाकर फिर बीसी खंडूरी को सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया गया था। अभी बीते दिनों हमने यह भी देखा था जब 2022 के चुनाव में पुष्कर सिंह धामी चुनाव हार गए थे लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा नेतृत्व ने विधायकों में से किसी को मुख्यमंत्री बनाने की बजाय चुनाव हार चुके प्रत्याशी धामी को ही भाजपा ने इस महत्वपूर्ण कुर्सी को सौंपने का काम किया गया था। अभी एक भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लोग सोचते हैं कि हम बिना सोचे विचारे अचानक कोई फैसला कर डालते हैं लेकिन ऐसा नहीं है हम हर एक फैसला बहुत पहले कर चुके हैं। हमने अभी गुजरात में यह देखा था कि पूरे मंत्रिमंडल से एक साथ इस्तीफा ले लिया गया था। 17 सदस्यीय मंत्रिमंडल में केवल पांच पुराने चेहरे ही दोबारा मंत्री बनाए गए जबकि 12 चेहरे बदलने के साथ 7और चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। उत्तराखंड के लोग और नेता इस बात को लेकर अब हैरान है कि मार्च 2022 से मंत्रिमंडल में खाली पड़े पदों को 4 सालो तक खाली क्यों रखा हुआ है जबकि कुछ मंत्रियों के निधन के कारण अब इन पदों की संख्या 5 हो गई है। इन दिनों सूबे की सियासत मे इस तरह की चर्चाएं आम है कि कहीं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उत्तराखंड में भी गुजरात वाला प्रयोग तो नहीं करने जा रहा है। कुछ जानकार लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि सीएम सहित पूरा मंत्रिमंडल बिहार चुनाव के बाद बदले जाने की तैयारी की जा रही है। इन चर्चाओं के कारण जो मंत्रिमंडल में शामिल है उनकी बेचैनी बढ़ना तो स्वाभाविक ही है साथ-साथ जो नए मंत्रिमंडल में मंत्री बनने का सपना संजोए बैठे हैं वह है भी परेशान है। उन्हें भी इस बात का इंतजार है कि जो कुछ भी होना है वह जल्दी से जल्दी हो जाए। मंत्रिमंडल के विस्तार या फेरबदल की खबरें और चर्चाएं तो सालों से हो रही है हर बार लगता है कि बस अब थोड़े बहुत दिनों में इस पर फैसला हो जाएगा लेकिन कब होगा फैसला यह किसी को भी पता नहीं है। बस सभी लोग दिल थाम कर इसका इंतजार ही कर रहे हैं।




