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सूबे में बड़ा बदलाव संभावी

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उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से एक सवाल भटक रहा है। यह सवाल है मंत्रिमंडल का विस्तार अथवा रिफॉर्म (बदलाव)। इसी एक सवाल के साथ यह सवाल भी चिपका हुआ है कि क्या बीते समय की तरह राज्य में नेतृत्व परिवर्तन भी हो सकता है। अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं लंबा समय बीत जाने के बाद भी उत्तराखंड की कैबिनेट में कोई फेर बदल नहीं किया गया। मार्च 2022 में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जो मंत्रिमंडल अस्तित्व में आया था व उसमें कुछ सदस्यों के आकस्मिक निधन तथा विवादों के कारण जो पद खाली हुए उसके कारण राज्य सरकार आधे—अधूरे मंत्रिमंडल के साथ ही अपना काम चला रही है। पांच कैबिनेट मंत्रियों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। मुख्यमंत्री धामी के पास तमाम विभागों का अतिरिक्त कार्यभार है। सालों से इस बात के कयास लगाये जाते रहे हैं कि मंत्रिमंडल में फेर बदल या विस्तार बस अब होने ही वाला है लेकिन स्थिति अब तक भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसके साथ ही गाहे—बगाहे नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार जारी रही है। इस बीच सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं को दायित्वों का बंटवारा भी किया जा चुका है। सीएम धामी के हर दिल्ली दौरे के बाद कैबिनेट में बदलाव या विस्तार की खबरें फैलाई जाती हैं। लेकिन थोड़े समय बाद फिर सन्नाटा छा जाता है। अब तो इस बात की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में होने लगी है कि इस बार कहीं उत्तराखंड में भी गुजरात जैसा बड़ा राजनीतिक धमाका हो सकता है। गुजरात में अभी बीजेपी हाई कमान द्वारा सभी मंत्रियों से इस्तीफे ले लिए गए थे वहां भी हालात उत्तराखंड जैसे ही थे। गुजरात विधानसभा जिसका कैबिनेट आकार 26 सदस्यों का है वहंा सरकार गठन से 17 सदस्यों का मंत्रिमंडल काम कर रहा था तथा 9 पद खाली पड़े थे। इन 17 मंत्रियों के इस्तीफे के बाद जब नया मंत्रिमंडल अस्तित्व में आया तो 11 मंत्रियों का पत्ता साफ हो गया। सिर्फ 6 पुराने चेहरे ही मंत्री पद बचा सके। यहां इस बड़ी सर्जरी का कारण मंत्रियों की खराब परफॉर्मेंस बताया गया था वहीं मंत्रिमंडल में 12 नए चेहरों को शामिल किया गया। जिसमें क्षेत्रीय तथा जातीय समीकरण को विशेष तवज्जो दी गई। बात अगर उत्तराखंड की करें तो यहां भी परफॉर्मेंस व क्षेत्र तथा जातीय संतुलन बनाने का प्रयास किया जा सकता है। इसमें कई नये चेहरों की किस्मत चमक सकती है। मंत्रिमंडल में अगर गुजरात फार्मूला अपनाया गया तो किस—किस की कुर्सी जाएगी इसे लेकर बेचैनी जरूर है वही जिन्हें मंत्री पद की आशा है वह भी इस विलम्ब के कारण बेचैन है। वह भी चाहते हैं कि जो होना है जल्द हो जाए। क्योंकि 2027 के चुनाव में अब समय ही कितना बचा है। भाजपा को नए—नए प्रयोगों के लिए जाना जाता है। चुनाव से पूर्व कई—कई सीएम बदलने से लेकर पूरी ही सरकार को बदलने तक भाजपा कुछ भी कर सकती है। उत्तराखंड मे भी कुछ बड़ा हो सकता है इसकी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन कब होगा इसकी अभी कोई तारीख तय नहीं है। हां इतना जरूर कहा जा सकता है कि अब जो कुछ भी होगा वह बिहार चुनाव के बाद ही होगा। अभी बीजेपी के नेताओं को कुछ दिन और इसी बेचैनी में गुजारने होंगे।

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