- धराली में मलबे में जीवन की तलाश जारी
- प्रभावितों तक राशन व जरूरी सामान पहुंचा
- विघुत आपूर्ति सुचारू करने में जुटी यूपीसीएल की टीम
उत्तरकाशी। धराली आपदा को आज 7 दिन का समय बीत चुका है। लेकिन अभी भी आपदा स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है। बीती रात से राज्य के तमाम जिलों में हो रही बारिश के कारण बचाव व राहत कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है खराब मौसम के कारण आज हेली सेवा पर भी ब्रेक लग गया है। गनीमत यह है कि यहां आपदा प्रभावितों तक राशन और जरूरी सामान पहुंचने से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली है।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आईटीबीपी, सेना और एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ के 1200 से ज्यादा लोग बचाव राहत कार्य में लगे हुए हैं। जिनके पास अत्याधुनिक यंत्र भी मौजूद हैं तथा उनके द्वारा अब मलवे और पत्थरों में जीवन की तलाश का अभियान चलाया जा रहा है इनके पास अर्थ सेंसर रडार और एडवांस पेंडिंग रडार से लेकर डॉग स्क्वायड भी है लेकिन 30 से 40 फीट के मलबे में अब तक किसी लापता को जिंदा या मुर्दा ढूंढ पाने में कोई कामयाबी नहीं मिल सकी है।
खराब मौसम के कारण आज मताली से उत्तरकाशी व धराली के बीच हेली सेवा का संचालन नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा एक्स पर दी गई जानकारी के अनुसार क्षेत्र में दूरसंचार सेवा शुरू हो चुकी है तथा बिजली आपूर्ति सुचारू करने का प्रयास यूपीसीएल की टीम द्वारा किया जा रहा है लोगों के पास राशन व जरूरी सामान की आपूर्ति पहुंच चुकी है तथा लिम्चागाड पुल पर यातायात सुचारू हो गया है। उनका कहना है कि जिन लोगों के घर, मकान दुकान व होटल इस आपदा में तबाह हुए उन्हें राहत पैकेज देने के लिए टीम जल्द धराली जाएगी। इस आपदा के कारणों की तलाश करने के लिए 10 भू वैज्ञानिकों की टीम भी धराली पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि आपदा का आकार अत्यंत बड़ा था तथा मौसम भी खराब है जिसके कारण बचाव राहत कार्य में बाधा आ रही है लेकिन सरकार का प्रयास जारी है कि प्रभावितों तक हर संभव मदद पहुंचाई जा सके। लेकिन जिन परिवारों का अब तक अपनों से कोई संपर्क नहीं हो सका है उनकी उम्मीदें हर बीतते समय के साथ टूटती जा रही है।




