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जाम ही जाम, यातायात व्यवस्था धड़ाम

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देहरादून। राजधानी में जिस जगह देखो जाम की स्थिति दिखायी देती है। यातायात कर्मियो के चौराहों से नदारद रहने का खामियाजा जनता को भुगतना पडता है। शहर में जाम ही जाम और यातायात व्यवस्था हो गयी धडाम।
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के बाद दून को अस्थायी राजधानी घोषित करने के बाद इस शहर वासियो की शायद किस्मत में जाम लिखवा दिया गया। राजधानी बनने के बाद सभी विभागाें के मुख्यालय दून में बन गये जिससे अधिकारियों व कर्मचारियों की भीड़ यहां पर आ गयी और उसके साथ ही बाहरी प्रदेशों से लोग यहां पर काम की तलाश में आने शुरू हो गये। जिससे यहां पर एक दम यातायात का दबाव बन गया। जहां पहले शहर की सडकों पर हजारों वाहनों का बोझ रहता था वही बोझ लाखों में पहुंच गया। जो भी अधिकारी या फिर कर्मचारी है सभी के पास दुपहिया से लेकर चौपहिया वाहन हैं। जब वह सुबह घर से निकलते हैं तो शहर में जाम लगना लाजमी हो जाता है। शहर की सडके वही है और राजधानी बनने के बाद उन सडकों का विस्तार तो नहीं हुआ लेकिन वाहनों की संख्या बढ गयी। जिससे शहर के चौराहोें से लेकर गली मौहल्लों में जाम लगना शुरू हो गया। अधिकारियों ने धरातल में आकर इस समस्या का समाधान तलाशने की जरूरत शायद ही महसूस की हो। जो भी अधिकारी राजधानी में आता है तो उसकी पहली प्राथमिकता यहां की जनता को जाम से निजाद दिलाने की होती है। यही नहीं वह अपने हिसाब से प्रयोग भी करता है लेकिन कुछ समय बाद वह भी इस जाम से परेशान होकर शांत बैठ जाता है। अभी तक 24 साल में अधिकारियों ने शहर के जाम के लिए दर्जनों प्रयोग कर लिये हंै लेकिन कोई भी प्रयोग सफल नहीं हो सका। क्योंकि सडकों का चौडीकरण हुआ नहीं तो जाम से मुक्ति कैसे मिल सकेगी और सडकों के चौडीकरण के लिए अधिकारियों को दृढ इच्छा शक्ति होनी जरूरी है जोकि अभी तक किसी अधिकारी में दिखायी नहीं दी। शहर का दिल घंटाघर भी इससे अछूता नहीं है। यहां पर हर आधे घ्ंाटे में जाम दिखायी देता है। जिसके बाद लोग वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करते हैं जिसके कारण गली मौहल्लों में जाम लग जाते हैं। हालत यहां तक हो गये है कि गली मौहल्लों में रहने वाले लोग खुद दहशत में रहते हैं और अपने बच्चों को सम्भालते रहते हैं कि कहीं किसी वाहन की चपेट में वह न आ जाये। मुख्य मार्गों पर जाम से जनता परेशान तो वहीं गली मौहल्लों में रहने वाले तेज गति से चलने वाले वाहनों से दहशत में रह रहे हैं। देखने वाली बात तो यह है कि शहर के मुख्य चौराहे घंंटाघर, दिलाराम बाजार, दर्शनलाल चौक, तहसील चौक, बिन्दाल चौक, प्रिंस चौक, सहारनपुर चौक यह सभी ऐसे चौराहे हैं जहां से शहर के लोगों का हर समय निकलना होता है और वहां पर जाम को देखकर लोगों की हिम्मत जवाब देने लगती है। लेकिन अधिकारी हैं कि उनको यह दिखायी नहीं देता या फिर वह इसको देखने को ही तैयार नहीं हैं। अब देखना है कि इस शहर को जाम के झाम से कौन बचा पायेगा।

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