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बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी?

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने राज्य के डेमोग्राफिक चेंज को लेकर अक्सर चिंता जताते रहे हैं। उनका मानना है कि राज्य के समाज को बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों द्वारा खराब किया जा रहा है राज्यों की जमीनों की लूट खसोट से लेकर तमाम तरह के अपराधों की जड़ में यह बाहरी राज्यों के लोग ही सबसे अहम कारण हैं। लूटपाट की घटनाओं से लेकर हत्या तथा महिलाओं से छेड़छाड़ और उनके यौन शोषण जैसे तमाम अपराधों का ग्राफ जो बढ़ रहा है वह सब अन्य राज्यों से आए लोगों की ही देन है। इसे रोकने के लिए उन्होंने लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे कानून भी बनाए गए हैं। अभी हमने विगत सालों में जो धार्मिक संरचनाओं पर बुलडोजर कार्यवाही होते हुए देखी थी वह सब उनकी इन्हीं नीतियों का परिणाम है। पहाड़ के कई ऐसे जनपद है जहां बीते समय में लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या बहला फुसला कर उन्हें भगा ले जाने और यौन शोषण की घटनाओं को लेकर भारी हंगामा हुआ है। केदार घाटी के कई क्षेत्रों में तो इस तरह के मामले सामने आने पर बाजार बंद और सड़कों को जन आंदोलन के साथ—साथ बाहरी लोगों के व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक में तोड़फोड़ तक की गई है। सही मायने में यह समस्या बाहरी लोगों की समस्या नहीं है यह एक कानून व्यवस्था की समस्या है। देश के तमाम राज्यों में अन्य राज्यों के लोगों का आना—जाना बसना और कोई कारोबार करना कोई नई बात नहीं है यह हर एक राज्य में होता है और होता रहेगा, क्योंकि संविधान और कानून इसका अधिकार देता है। बाहरी राज्यों से आने वाले लोग कौन हैं उनका इतिहास भूगोल क्या है? इसे जानना राज्य सरकार का अधिकार है। वह किस उद्देश्य से आए हैं और क्या करते हैं? इस पर प्रशासन द्वारा नजर रखी जानी चाहिए। यही नहीं अगर उनकी कोई भी गतिविधि समाज और कानून के खिलाफ है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए? लेकिन अगर कोई राज्य या समाज दूसरे राज्यों के लोगों के आने—जाने पर प्रतिबंध लगाता है तो यह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं हो सकता है। रुद्रप्रयाग जिले के कई गांवों में इन दिनों ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं जिन पर लिखा है कि गांव में बाहरी राज्य के लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है अगर कोई व्यक्ति गांव में घूमता या फेरी तथा व्यापार करता पकड़ा जाएगा तो उस पर 500 रूपये जुर्माना लगाया जाएगा तथा सजा भी दी जाएगी यह बोर्ड ग्राम पंचायतों के हवाले से लगाए गए हैं। इन गैर कानूनी बोर्डो को लेकर हालांकि प्रशासन का कहना है कि वह उन्हें हटाएगा। सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड के लोग दूसरे राज्यों में नहीं आते जाते या रहते हैं या फिर उनकी किसी भी तरह के अपराधों में संलिप्तता होती ही नहीं है तब क्या देश के सभी राज्यों को अपने यहां वही करना चाहिए जो उत्तराखंड में हो रहा है। राज्य में होने वालों कुल अपराधों में से 90 फीसदी अपराधों में राज्य के लोग ही होते हैं। राज्य के लोगों को अपराधों से रोकने के लिए क्या कुछ किया जा रहा है। बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रदेश से रोकने से ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा खतरा चाहे अपनों से हो या फिर बाहरी लोगों से खतरा तो खतरा ही होता है।

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