- कर्मचारियों की कार्य संस्कृति बदलने का प्रयास
- संघ की विचारधारा को थोपने का आरोप
देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर आरएसएस की शाखों और कार्यक्रमों में भाग लेने पर लगी रोक को हटा लिया गया है। अब सरकारी कर्मचारी संघ के कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। सरकार के इस आदेश पर कांग्रेसी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक गलत परंपरा की शुरुआत बताया है।
प्रदेश के पूर्व पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदयाल का कहना है कि सरकार का यह फैसला राजनीति से प्रेरित है, उसके इस फैसले से आम जनता को भला क्या लाभ हो सकता है। जिन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को नौकरी पर जनता के कामकाज करने के लिए रखा जाता है उन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्य संस्कृति किसी वर्ग विशेष या राजनीतिक दल विशेष की कार्य संस्कृति से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। लेकिन अब भाजपा उनकी कार्य संस्कृति को अपने अनुकूल बनाने के लिए ऐसे तमाम गलत फैसले कर रही है।
उन्होंने कहा है कि यह बात देश के सभी लोग जानते हैं कि संघ की अपनी एक अलग विचारधारा है तथा भाजपा संघ से ही निकली हुई एक राजनीतिक पार्टी है। संघ और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। भले ही संघ के नेता संघ को एक गैर राजनीतिक संगठन मानते हो। उधर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि अब भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं की कमी हो रही है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों को भाजपा संघ की पाठशाला से शिक्षित बनाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा है कि इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यश्ौली में बदलाव आएगा इसका नुकसान देश के समाज को होगा।
उल्लेखनीय है कि बीते कल धामी सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि अब सरकारी कर्मचारी संघ की शाखाओंं और कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकेंगे और इसे अब कर्मचारी सेवा नियमावली का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। राज्य सरकार का यह आदेश केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों पर संघ के कार्यक्रमों में भाग लेने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव लाये जाने के बाद आया है। लेकिन कांग्रेस इसे गलत बता रही है और उसका कहना है कि इस तरह अन्य राजनीतिक दलों को संरक्षण देने वाले भी उनके लिए काम करने वाले अन्य गैर राजनीतिक संगठनों के लिए भी रास्ता खुल जाएगा और उन्हें रोका नहीं जा सकेगा।



