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आखिर सरकार को याद आयी शराब के ठेकों पर ओवर रेटिंग की

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देहरादून। आखिर छह माह बाद सरकार को याद आ ही गयी शराब के ठेकों पर ओवर रेटिंग की और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आबकारी विभाग को छापेमारी के आदेश दे ही दिये।
आज यहां सरकार को छह माह बाद शराब के ठेकों पर ओवर रेटिंग की याद आ ही गयी और आनन फानन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रशासन और आबकारी विभाग की टीम पूरे प्रदेश में 100 से ज्यादा अधिक शराब की दुकानों पर छापेमारी अभियान चला रही है। औचक चले इस अभियान से ठेका संचालकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। ऋषिकेश में पत्रकार पर शराब माफियाओं द्वारा जानलेवा हमला होने के बाद सरकार को शराब के ठेको पर ओवर रेटिंग व शराब तस्करों पर कार्यवाही की याद आयी। लंबे समय से सीएम धामी को प्रदेश में शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग और प्रदेश के कई क्षेत्रों में शराब की तस्करी की शिकायतें मिल रही थी, जिस पर सीएम धामी ने प्रशासन और आबकारी विभाग को अभियान चलाते हुए इस पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। जिस पर टीम ने पिथोरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, ऊधम सिंह नगर, चंपावत, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी गढ़वाल जनपद में छापेमारी अभियान चला रही है। सीएम धामी के सख्त निर्देश हैं कि यदि दुकानों पर ओवर रेटिंग की शिकायत सही मिलती है और स्टॉक और बिक्री रजिस्ट्रर मेंटेन नहीं मिलता तो दुकानों को सीज किया जाए। प्रदेश में ओवररेटिंग और शराब की तस्करी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टीम को समय—समय पर अभियान चलाने और तस्करी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जबकि जिला प्रशासन व आबकारी विभाग की नाक के नीचे यह ओवर रेटिंग व तस्करी होती है जिसके बारे में सब को मालूम है कि दुकानों पर ओवर रेटिंग व बाहरी क्षेत्रों में शराब की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है उसके बाद भी अभी तक कोई ठोस रणनीति नहीं बनायी गयी। वहीं शराब ठेके के सेल्समैन खुलेआम ओवर रेटिंग करते हैं और कहीं भी शिकायत करने की धमकी ग्राहकों को देेते है और कई बार शिकायतें भी हुई लेकिन यह नहीं रूक सकी। अब जब मुख्यमंत्री को इसकी याद आ ही गयी है तो देखना यह होगा कि इसपर किस हद तक रोक लगायी जा सकेगी। यह आदेश एक दो दिनों के लिए होगा या फिर पूरे साल तक इन आदेशों का पालन किया जायेगा। यह वक्त ही बतायेगा कि मुख्यमंत्री के आदेशों को शासन प्रशासन के अधिकारी कितनी गम्भीरता से लेते हैं।

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