July 15, 2026उत्तराखंड में भी एसआईआर को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे मतदाता सूची को स्वच्छ और निष्पक्ष बनाने का अभियान बता रहा है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इसके बहाने कुछ वर्गों के मतदाताओं को सूची से बाहर करने की आशंका पैदा की जा रही है। अब जब 19 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की बात सामने आई है, तो यह चिंता और बढ़ गई है कि कहीं तकनीकी त्रुटियों के नाम पर पात्र नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े। यदि नोटिस का प्रारूप स्पष्ट नहीं हुआ, जवाब देने की प्रक्रिया सरल नहीं रखी गई और दस्तावेजों की सूची अत्यधिक जटिल हुई, तो इसका सीधा असर मताधिकार पर पड़ सकता है। उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्य में मतदाता सूची का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां लगातार पलायन, रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में आवाजाही, सैनिक परिवारों की विशेष परिस्थितियां और तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र मतदाता सूची को जटिल बनाते हैं। ऐसे में पुनरीक्षण आवश्यक है, लेकिन इसकी प्रक्रिया इतनी सरल और पारदर्शी होनी चाहिए कि किसी पात्र नागरिक का नाम केवल तकनीकी कारणों से न कटे। नोटिस पाने वाले मतदाताओं को पहचान, निवास, आयु और पात्रता से जुड़े वैध दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता पर लोकतंत्र टिका है। इसलिए आयोग की हर कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जिस पर किसी भी दल या मतदाता को संदेह न हो। यदि किसी नागरिक का नाम हटाया जाता है तो उसके पीछे स्पष्ट कारण हो, समय पर सूचना मिले और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर भी मिले। लोकतंत्र में मताधिकार केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक शक्ति है। 19 लाख मतदाताओं को नोटिस देने जैसी बड़ी कार्रवाई तभी विश्वसनीय मानी जाएगी, जब उसमें पारदर्शिता, समयबद्धता और मानवीय संवेदनशीलता तीनों मौजूद हों। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। यदि किसी प्रक्रिया में वास्तविक खामी है तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ सामने लाया जाए। लेकिन यदि बिना पर्याप्त आधार के हर प्रशासनिक कदम को राजनीतिक साजिश बताया जाएगा, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर होगा। दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के पक्षपात के आरोप से परे दिखाई दे। नोटिस, जवाब और दस्तावेजों की पूरी व्यवस्था इतनी स्पष्ट हो कि आम मतदाता को यह न लगे कि उसके अधिकार पर अनावश्यक बोझ डाला जा रहा है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट सुनाई देने लगी है। ऐसे समय में मतदाता सूची का हर संशोधन राजनीतिक चश्मे से देखा जाएगा। इसलिए चुनाव आयोग, प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों को अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा। किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर होना लोकतंत्र की हार होगी, वहीं किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में बने रहना चुनावी शुचिता पर प्रश्नचिह्न लगाएगा। 19 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया यदि सही ढंग से नहीं संभाली गई, तो यह शुद्धिकरण अभियान भरोसे के संकट में बदल सकता है। लोकतंत्र की मजबूती मतदाता सूची की शु(ता से ही नहीं, बल्कि उस शु(ता पर जनता के विश्वास से भी तय होती है। एसआईआर की सफलता इसी कसौटी पर परखी जाएगी कि हर पात्र मतदाता निश्चिंत होकर कह सके मेरा वोट सुरक्षित है, मेरा अधिकार सुरक्षित है।
July 14, 2026मुख्य सचिव ने शहरी विकास विभाग से सम्बन्धित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में शहरी विकास विभाग से सम्बन्धित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड के सभी शहरी स्थानीय निकायों को साफ-सुथरा वातावरण, सुरक्षित पेयजल, जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर शहर बनाये जाने की दिशा में विभाग को निरंतर कार्य किए जाने पर जोर दिया।मुख्य सचिव ने प्रदेश के अंतर्गत सभी यूएलबी में वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण और स्रोत पर कचरे का पृथक्करण कार्य 100 प्रतिशत सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुराने डंप साइट्स का सुधारीकरण कार्य को भी तेजी प्रदान करते हुए शीघ्र से शीघ्र कार्य पूर्ण कराए जाने की बात कही।मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग के विज़न के अनुरूप सभी शहरी निकायों को आत्म निर्भर बनाना है। इसके लिए शहरी निकायों को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इनसे सम्बन्धित अधिकारियों और सम्बन्धित अनुभाग अधिकारियों, विभागीय अधिकारियों को अच्छे से प्रबंधन किए गए देश-विदेश के शहरों का एक्सपोजर ट्रिप कराए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि इससे अपने शहरों को अच्छे से मैनेज करने में सहायता मिलेगी।मुख्य सचिव ने पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए स्रोत के साथ ही पेयजल लाइन के अंतिम छोर पर भी वाटर क्वालिटी सेंसर लगाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरी विकास को डिजिटल गवर्नेंस पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। कहा कि सभी शहरी निकायों को शीघ्र से शीघ्र ऑनबोर्ड किया जाए।इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा एवं अपर सचिव अभिषेक रुहेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
July 14, 2026भाजपा ने प्रकोष्ठों को बनाया अपनी ‘ग्राउंड फोर्स’ हर वर्ग को साधने के लिए प्रकोष्ठों को मिली कमान चुनावी फतह के लिए भाजपा ने रचा नया चक्रव्यूह प्रकोष्ठों की कार्यशाला में चुनाव का ब्लूप्रिंट तैयार देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ भाजपा ने अब अपने संगठनात्मक ढांचे को धार देना शुरू कर दिया है। राजधानी में आयोजित प्रदेश एवं जिला प्रकोष्ठ कार्यशाला केवल एक नियमित संगठनात्मक बैठक नहीं रही, बल्कि इसे आगामी चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। कार्यशाला में निकाय, स्वयं सहायता समूह, पंचायत, एनजीओ, विधि और गोरखा प्रकोष्ठ के प्रदेश एवं जिला संयोजकों तथा सह-संयोजकों ने भाग लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में विभिन्न प्रकोष्ठों की भूमिका, संगठन के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी कार्ययोजना पर विस्तृत मंथन हुआ।भाजपा की रणनीति अब केवल पारंपरिक राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं दिख रही। पार्टी उन वर्गों तक भी अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है जो स्थानीय स्तर पर सामाजिक प्रभाव रखते हैं। पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, अधिवक्ता, सामाजिक संगठन और गोरखा समाज जैसे वर्गों के बीच सक्रिय प्रकोष्ठों को चुनावी तैयारी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के संकेत मिले हैं। भाजपा इस माडल के जरिए बूथ स्तर की संगठनात्मक ताकत को सामाजिक नेटवर्क से जोड़ना चाहती है, ताकि सरकारी योजनाओं, संगठन के संदेश और राजनीतिक अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके।राहुल गांधी के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे और कांग्रेस के युवा केंद्रित अभियान के बीच भाजपा की यह कार्यशाला भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी विपक्ष के अभियान को केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि संगठन की मजबूती के जरिए जवाब देने की तैयारी कर रही है। भाजपा नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि चुनाव केवल बड़े नेताओं की रैलियों से नहीं, बल्कि मजबूत संगठन और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के दम पर जीते जाते हैं।सूत्रों के अनुसार पार्टी आने वाले महीनों में प्रत्येक प्रकोष्ठ को लक्ष्य आधारित जिम्मेदारियां सौंप सकती है। सदस्यता विस्तार, सामाजिक संपर्क, लाभार्थियों तक पहुंच, बूथ सशक्तीकरण और स्थानीय मुद्दों पर संवाद जैसे अभियान प्रकोष्ठों के माध्यम से संचालित किए जा सकते हैं। यानी भाजपा केवल चुनावी प्रचार की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि एक ऐसे संगठनात्मक तंत्र को सक्रिय कर रही है जो मतदान तक लगातार मैदान में मौजूद रहे।
July 14, 2026देहरादून। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल आज देहरादून प्रेस क्लब पहुंचे। जहंा उन्होंने बदरीनाथ—केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर मामले को दबाने का आरोप लगाया और सार्वजनिक बहस की चुनौती दोहराई। लेकिन द्विवेदी वहां नही पहूंचे जबकि उनके नाम लगी कुर्सी वहंा मौजूद रही।गणेश गोदियाल ने कहा कि चढ़ावा चोरी के मामले में एक व्यक्ति सीसीटीवी फुटेज में नकदी निकालते हुए दिखाई दिया। इसके बावजूद मामले में समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह मामला बाहर नहीं आता तो इसे दबा दिया जाता। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी मंदिर समिति अध्यक्ष की बनती है। गोदियाल ने कहा कि उनका कार्यकाल नौ साल पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन अब उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस कर्मचारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसकी नियुक्ति और बाद की जिम्मेदारियां उनके कार्यकाल के बाद की हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को संदेह है तो पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराई जाए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार समय रहते कार्रवाई करती तो मामला इतना नहीं बढ़ता।उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई नहीं की गई है। प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे पूछा गया कि यदि हेमंत द्विवेदी दोबारा सार्वजनिक बहस के लिए बुलाते हैं तो क्या वह जाएंगे, इस पर गोदियाल ने कहा कि वह किसी भी स्थान पर बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले से सूचना दी जाएगी तो वह निश्चित रूप से पहुंचेंगे और पूरी चर्चा अनुशासन के साथ होगी।
July 14, 2026पौड़ी। हरेला पर्व के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर विकासखंड स्थित मालाग्राम पहुंचकर सघन पौधरोपण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ का विस्तृत भ्रमण कर वहां संरक्षित दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों, अनुसंधान गतिविधियों तथा आयुर्वेद आधारित नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परिसर स्थित ध्यान कुटी का भी निरीक्षण किया।मुख्यमंत्री ने भ्रमण के दौरान उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता, हिमालयी औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष फोकस किया। उन्होंने कहा कि राज्य की यह प्राकृतिक धरोहर पूरे विश्व के लिए अमूल्य है तथा इसका संरक्षण और वैज्ञानिक शोध वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में किए जा रहे प्रयास पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के साथ-साथ औषधीय पौधों के संवर्धन, आयुर्वेद आधारित अनुसंधान, हर्बल पर्यटन तथा स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेंगे।मालाग्राम स्थित ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ देश का अपनी तरह का एक अनूठा हर्बल पार्क है, जहां देश के विभिन्न राज्यों एवं हिमालयी क्षेत्रों से लाई गई दुर्लभ जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। यह परिसर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक शोध के समन्वय का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष राजगौरव नौटियाल, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
July 14, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय स्थित अपने सभागार में पर्यटन विभाग की समीक्षा की। उन्होंने पर्यटन विभाग की सभी योजनाओं पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की आर्थिकी के महत्त्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। उन्होंने पर्यटन विभाग को अपने 5 वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए, ताकि आउटकम इंडीकेटर्स के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।मुख्य सचिव ने अपने प्रोडक्ट्स के प्रचार प्रसार के लिए भी विशेष प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि प्रोडक्ट की पब्लिसिटी के बिना निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करना आसान नहीं होगा। उन्होंने पब्लिसिटी के लिए भी वार्षिक कार्ययोजना तैयार किये जाने की बात कही। कहा कि नीती घाटी में आयोजित की गयी नीती एक्स्ट्रीम अल्ट्रा रन 2026, आदि कैलाश हाई एल्टीट्यूड मैराथन, रिवर राफ्टिंग फेस्टिवल्स और विंटर कार्निवल जैसे इवेंट्स को अन्य स्थानों पर इस प्रकार के अलग—अलग इवेन्ट्स के रूप में प्रत्येक वर्ष एक निश्चित समय पर आयोजित किया जाए। ऐसे इवेंट पब्लिसिटी के साथ—साथ टूरिस्ट्स के लिए आकर्षण का केन्द्र बनते हैं।मुख्य सचिव ने पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लाँग टर्म योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन सर्किट और डेस्टिनेशन बनाने के साथ—साथ जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर ध्यान दिया जाए। साथ ही, हॉस्पिटैलिटी व पर्यटन प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट सेक्टर के निवेशकों को भी शामिल किया जाए। प्रदेश में लगातार नए पर्यटन स्थल विकसित किए जाएं। कहा कि समावेशी और टिकाऊ पर्यटन विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि पूरे राज्य में संतुलित विकास हो सके।मुख्य सचिव ने प्रदेश के युवाओं को गाईड प्रशिक्षण दिए जाने की दिशा में कार्य किए जाने की बात कही। कहा कि इसे इंस्टीट्यूशनल किया जाए। आईएचएम को इसके लिए प्रयोग किया जा सकता है। प्रशिक्षण मॉड्यूल इस प्रकार से तैयार किए जाएं कि प्रशिक्षित युवाओं को प्रदेश के साथ—साथ, पूरे भारत और ओवरसीज में कहीं भी रोजगार मिल सके। उन्होंने वाईब्रेंट विलेज के लिए भी विशेष प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्लैंपिंग प्रोजेक्ट्स की काफी डिमांड है। उन्होंने इसके लिए स्थान चिन्हित कर ग्लैंपिंग प्रोडक्ट विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए।इस अवसर पर सचिव श्री धीराज गर्ब्याल एवं अपर सचिव अभिषेक रोहिला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।