August 15, 2026परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में सीएम ने किया ध्वजारोहदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ट्टवंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ। आज यहां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया तथा फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 14 पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। जिसमें 7 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा के आधार पर एवं 6 को विशिष्ट कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करने वाले 13 खिलाड़ियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत पहुंचाना, घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों ने अपने घर एवं आजीविका खोई है, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है। इस वर्ष देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा राष्ट्रगीत ट्टवंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती तथा सिक्ख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उन्होंने विभाजन विभीषिका के दौरान अमानवीय यातनाएं झेलने, अपनों को खोने और विस्थापन का दर्द सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होने कहा कि देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने के साथ सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भटृ, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, शासन के सचिव, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल एवं अन्य महानुभाव उपस्थित थे।
August 15, 2026हाईवे से बाजार और घरों तक मंडराया खतरा, बारिश ने की परीक्षा लेनी शुरू कहीं हाईवे का हिस्सा धंस रहा तो कहीं सड़क के नीचे की जमीन खिसक रही बाजार व आबादी वाले इलाकों पर खतरा बढ़ा, कई जगह भवनों की नींव हिली देहरादून। मानसून उत्तराखंड के लिए इस बार सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि पहाड़ की कमजोर होती जमीन का इम्तिहान बनता जा रहा है। लगातार हो रही बारिश के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण सड़कों तक कहीं सड़क धंस रही है तो कहीं सड़क के नीचे की जमीन खिसक रही है। सबसे बड़ी चिंता उन बाजारों और आबादी वाले क्षेत्रों को लेकर है, जहां पहाड़ी ढलानों पर वर्षों से निर्माण होता आया है। सड़क कटने या जमीन धंसने का असर अब सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रह गया है। कई जगह आसपास बने भवनों की नींव पर भी खतरा मंडराने लगा है।बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर दरारें पड़ना और सड़क का हिस्सा धंसना नया नहीं है। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पहाड़ों में सड़क निर्माण के दौरान भूगर्भीय स्थिति और जल निकासी को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? जहां सड़क के किनारे पानी की निकासी की व्यवस्था कमजोर है, वहां बारिश का पानी पहाड़ के भीतर पहुंचकर मिट्टी और चट्टानों को कमजोर कर सकता है। इसके बाद ढलान का संतुलन बिगड़ते ही जमीन खिसकने लगती है। कई स्थानों पर सड़क को बचाने के लिए तत्काल डामर या मलबा डाल दिया जाता है। इससे रास्ता कुछ समय के लिए चलने लायक तो हो जाता है, लेकिन यदि मूल समस्या का उपचार नहीं हुआ तो अगली बारिश में वही संकट फिर सामने आ जाता है।पहाड़ी कस्बों में बाजार अक्सर सड़क के दोनों ओर विकसित हुए हैं। सड़क के नीचे दुकानें और ऊपर मकान ऐसी तस्वीर उत्तराखंड के कई कस्बों में दिखाई देती है। ऐसे में सड़क का एक हिस्सा धंसता है तो उसका असर सिर्फ सड़क पर नहीं पड़ता। नीचे बनी दुकानों, मकानों और अन्य निर्माणों तक खतरा पहुंच जाता है। व्यापारियों की चिंता भी बढ़ रही है। सड़क बंद हुई तो बाजार का संपर्क टूटता है, ग्राहक नहीं पहुंचते और सामान की आपूर्ति प्रभावित होती है। वहीं भवनों के आसपास जमीन खिसकने लगे तो कारोबार के साथ लोगों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो जाता है। पहाड़ों में निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती ढलान है। यदि पहाड़ काटकर सड़क या भवन बनाया गया है और उसके बाद पर्याप्त रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज और ढलान सुरक्षा नहीं की गई तो भारी बारिश में जोखिम बढ़ जाता है।कई जगह जमीन में छोटी दरारें शुरुआत में मामूली दिखाई देती हैं। लेकिन लगातार बारिश के बाद यही दरारें बड़े भूस्खलन का संकेत बन सकती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ लंबे समय से बारिश के मौसम में संवेदनशील ढलानों और भवनों की निगरानी की जरूरत बताते रहे हैं। हर बार पहाड़ टूटने के बाद सबसे आसान जवाब होता हैकृभारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ। लेकिन सवाल यह है कि क्या बारिश अकेली जिम्मेदार है? प्राकृतिक बारिश को रोका नहीं जा सकता। लेकिन बारिश के पानी को पहाड़ के भीतर जाने से रोकना, जल निकासी व्यवस्था मजबूत करना, संवेदनशील ढलानों की पहचान करना और निर्माण के दौरान भूगर्भीय जोखिम को समझना इंसानी जिम्मेदारी है। अगर हर मानसून में सड़क धंसे और हर बार हम बारिश को दोष देकर आगे बढ़ जाएं तो समस्या का समाधान कब होगा?उत्तराखंड को सड़कें चाहिए। बेहतर कनेक्टिविटी चाहिए। पर्यटन और चारधाम यात्रा के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा चाहिए। लेकिन सवाल सड़क बनाने का नहीं, सुरक्षित सड़क बनाने का है। पहाड़ को मैदान की तरह काटकर सड़क बनाना और फिर बारिश आने पर सुरक्षा कार्य शुरू करना दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकता। जरूरत है कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे हो। सड़क निर्माण से पहले भूगर्भीय अध्ययन हो। पानी की निकासी को प्राथमिकता दी जाए और पुराने भूस्खलन क्षेत्रों की नियमित निगरानी हो। बारिश थम जाएगी। धूप निकलेगी। सड़कें फिर सामान्य हो जाएंगी। बाजारों में रौनक लौट आएगी। लेकिन जो पहाड़ बारिश के दौरान कमजोर हुआ है, वह खतरा खत्म होने के बाद भी कमजोर रह सकता है। इसलिए अभी किए गए अस्थायी मरम्मत कार्यों के साथ-साथ दीर्घकालिक सुरक्षा योजना जरूरी है। क्योंकि उत्तराखंड में सवाल सिर्फ सड़क बचाने का नहीं है। सवाल सड़क के किनारे बसे बाजारों, दुकानों और घरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा का भी है।बारिश हर साल आएगी। पहाड़ भी अपनी जगह रहेगा। अब फैसला यह करना है कि विकास की हमारी रफ्तार पहाड़ की सहनशीलता के साथ चलेगी या हर मानसून हमें फिर उसी सवाल के सामने खड़ा करेगी कि सड़क बची या पहाड़? और अगर पहाड़ ही खिसक गया तो सड़क किसके लिए?
August 15, 2026देहरादून। स्वतंत्रता दिवस—2026 के अवसर पर पुलिस मुख्यालय, उत्तराखण्ड देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने ध्वजारोहण कर सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। इसके उपरान्त पुलिस महानिदेशक महोदय ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर चयनित पुलिस कर्मियों को पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति डिस्क ’गोल्ड’ एवं पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति डिस्क ’सिल्वर’ एवं “पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सभी को बधाई दी। अपने सम्बोधन में पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने कहा साथियों, स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर मैं आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। आज का यह दिन हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों, वीर आजादी के नायकों और अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करने का अवसर देता है, जिनके त्याग, साहस और बलिदान के कारण आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक हैं। साथियों, राष्ट्र की एकता और अखंडता, संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है। इस दायित्व के निर्वहन में हमारे पुलिसकर्मी सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे हैं।आज पदक एवं सम्मान—चिह्न प्राप्त करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मैं पूरे पुलिस परिवार की ओर से हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे गर्व है कि उत्तराखण्ड पुलिस ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पेशेवर दक्षता और कार्यकुशलता का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री के रोड शो में सुरक्षा प्रबन्धन की कड़ी चुनौती से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में आयोजित पांच दिवसीय न्याय संहिता प्रदर्शनी के सफल आयोजन तक, पुलिस ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन किया है।विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा और कांवड़ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को बेहतर समन्वय के साथ संभालते हुए हमने सुरक्षा, सेवा और आस्था तीनों के बीच संतुलन बनाए रखा। उत्तराखण्ड पुलिस की हर सफलता के पीछे आपके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण की कहानी है। मैं आप सभी के जज्बे की सराहना करता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम सभी इसी निष्ठा, साहस और कर्तव्यपरायणता के साथ उत्तराखण्ड की शांति, सुरक्षा और कानून—व्यवस्था को और मजबूत करते हुए प्रदेशवासियों की सेवा करते रहेंगे। इस अवसर पर वी. मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, ए पी अंशुमान, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन सहित समस्त पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण सहित पुलिस मुख्यालय के समस्त अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।
August 15, 2026एक और श्रमिक बाहर निकाला गया, दो की तलाश जारीचमोली। मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को हुई दुर्घटना के बाद लापता श्रमिकों की तलाश एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रेस्क्यू अभियान के दौरान एक और श्रमिक को टनल से बाहर निकालकर जिला चिकित्सालय, गोपेश्वर भेजा गया है। टनल में लापता दो अन्य श्रमिकों की तलाश युद्धस्तर पर जारी है। रेस्क्यू टीमें टनल के भीतर लगातार सर्च अभियान चला रही हैं। अभियान के दौरान टनल में मौजूद पानी की निकासी का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए सक्शन पंपों सहित अन्य आवश्यक उपकरणों की मदद ली जा रही है, ताकि टनल के भीतर रेस्क्यू टीमों की आवाजाही सुगम हो सके और संभावित स्थानों तक पहुंचकर लापता श्रमिकों की खोज की जा सके। जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा संबंधित विभागों की टीमें आपसी समन्वय के साथ राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। रेस्क्यू कार्य की लगातार निगरानी की जा रही है तथा अभियान को गति देने के लिए आवश्यक संसाधन एवं उपकरण मौके पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा लापता दोनों श्रमिकों की तलाश को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी संभावित स्थानों पर सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू टीमों द्वारा पूरी तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है और श्रमिकों तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
August 15, 2026चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर फोर्ट सेंट जॉर्ज से अपना पहला स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। इस कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने राज्य सचिवालय में तिरंगा फहराया और अपनी सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं के बारे में बताया, जो सामाजिक कल्याण, पारदर्शिता और सुशासन पर केंद्रित हैं। उनके भाषण की मुख्य बात राज्य भर में नवजात बच्चों के लिए एक कल्याणकारी योजना की घोषणा थी। अगले महीने शुरू होने वाली इस पहल के तहत, लगभग 755.83 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठियां दी जाएंगी। उन्होंने कहा, भ्रष्टाचार को खत्म करना आजादी के बराबर है, सरकार इसी लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है। हम अपनी सरकार के खिलाफ काम करने वाली ताकतों और साजिशों को हराएंगे। 15 सितंबर को, 755.83 करोड़ रुपये की लागत से नवजात शिशुओं के लिए सोने की अंगूठी उपहार योजना शुरू की जाएगी।बता दें कि तमिलनाडु की संस्कृति में यह परंपरा है कि जब भी परिवार में कोई बच्चा पैदा होता है तो उसका सगा मामा उसे सोने का उपहार देता है। थलपति विजय सरकार का कहना है कि वह खुद राज्य के हर बच्चे के ‘मामा’ की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा था कि इस रिश्ते को निभाते हुए बच्चे का स्वागत सोने की अंगूठी से करेगी। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी अस्पतालों में लोगों का भरोसा और बढ़ेग। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी का खर्च मात्र 1,364 रुपये आता है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में यह 63,000 रुपये से ज्यादा है। ऐसे में यह योजना गरीब माताओं के लिए बड़ा सहारा बनेगी।
August 15, 2026नइ दिल्ली। इंडोनेशिया के तट पर शनिवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई इमारतें हिलती हुई नजर आईं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.7 आंकी गई। इस तेजी का भूकंप काफी शत्तिशाली माना जाता है और इससे इमारतों को भारी नुकसान हुआ। इस भूकंप के कारण 22 लोगों की मौत हो चुकी है।भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई और कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अधिकारियों ने आशंका जताई कि भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। भूकंप शनिवार को स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। रिपोर्टों के अनुसार, 20 लोगों की मौत हो चुकी है, छह लोग घायल हैं और दो लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। हमारा ध्यान मलबे के नीचे दबे पीड़ितों को खोजने पर केंद्रित होगा।ष् शुक्रवार को भारत में भी कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। हालांकि, इनकी तीव्रता बेहद कम थी।