Home News Posts उत्तराखंड कुदरत की मार, शासन—प्रशासन भी लाचार

कुदरत की मार, शासन—प्रशासन भी लाचार

0
401
  • 30 घंटे बाद भी नहीं पहुंच सकी धराली तक मदद
  • गंगोत्री हाईवे कई स्थानों पर बाधित
  • भटवाड़ी क्षेत्र में बना स्थाई पुल भी बहा
  • डीएम व एसपी उल्टे पांव उत्तरकाशी लौटे
  • एनडीआरएफ की टीमे भी नहीं पहुंच सकी

उत्तरकाशी। बीते कल दोपहर प्राकृतिक आपदा के जिस कहर से पूरे देश का कलेजा कांप उठा था वहां पीड़ितों की मदद के लिए 24 घंटे बाद भी शासन—प्रशासन की पहुंच पाना संभव नहीं हो सका है। घटना स्थल तक पहुंच पाने वाला एकमात्र गंगोत्री हाईवे आधा दर्जन स्थानों पर भूस्खलन व भू—धसाव के कारण बाधित हो चुका है तथा भागीरथी का पुल टूट जाने से सड़क मार्ग से यहां तक पहुंचना अब संभव नहीं है। वहीं उत्तरकाशी सहित पूरे राज्य में हो रही मूसलाधार बारिश से हवाई मार्ग से भी पीड़ितों तक पहुंच पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अब वायु सेवा के चिनकू को लाया गया है जो इस क्षेत्र तक कम से कम लॉजिस्टिक्स एड पहुंचाने के प्रयास कर रहा है।
बीते कल दोपहर लगभग 1.30 बजे के आस पास यहां खीर गंगा के रास्ते पहाड़ से पानी और मलबे के तेज बहाव में धराली के बाजार सहित 25—30 होटल व होमस्टे और दर्जनों आवासीय घरों को पूरी तरह से तहस—नहस कर दिया गया था। इस आपदा के समय जो भी सुरक्षा कर्मी व क्षेत्र के लोग मौजूद थे उसके अलावा इस क्षेत्र में स्थित गोपांग आइटीबीपी कैंप के जवान ही पीड़ितों की मदद के लिए मौजूद है। उत्तरकाशी मुख्यालय से जो यहां से 80 किलोमीटर दूर है, से भी एसडीआरएफ या एनडीआरएफ की कोई टीमें या प्रशासनिक अधिकारी कल धराली नहीं पहुंच सके थे। क्योंकि मौसम अत्यधिक खराब था।
आज जिलाधिकारी और एसपी मैडम ने धराली जाने की कोशिश की लेकिन भटवाड़ी क्षेत्र में गंगोत्री हाईवे के डेढ़ सौ मीटर से अधिक हिस्से पास आउट होने के कारण उन्हें उल्टे पांव लौटने पर विवश होना पड़ा। वहीं एनडीआरएफ की टीमें भी किसी तरह गंगनानी जो दुर्घटना स्थल से लगभग 16 किलोमीटर दूर है भागीरथी पर बना पुल बह जाने के कारण आगे नहीं जा सके। क्योंकि उफनाती भागीरथी को पार कर पाना संभव नहीं था। गंगोत्री हाईवे में सिर्फ एक दो जगह नहीं कम से कम आधा दर्जन स्थानों पर भूस्खलन या भू धसाव के कारण बंद है। सीओ मसूरी जिनकी ड्यूटी धराली आपदा में लगाई गई थी वह टिहरी के भवान में भूस्खलन के कारण फस गए, वहीं नरेंद्र नगर से लेकर गंगनानी तक कई स्थानों पर आपदा राहत टीमेंं फंसी रही और आगे नहीं जा सकी। आपदा स्थल पर जो लोग मौजूद हैं सिर्फ वही पीड़ितों की मदद में जुटे हैं। आज दोपहर 3 बजे तक कहीं से भी पीड़ितों के पास कोई मदद नहीं पहुंच सकी। दोपहर बाद सेना का चिनकू हेलीकॉप्टर जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचा है जो अब आपदा प्रभावितों तक लॉजिस्टिक एड पहुंचाने का काम करेगा।
इस आपदा में कुल कितना जान माल का नुकसान हुआ है इसकी कोई जानकारी भी किसी को नहीं मिल पा रही है क्योंकि प्रभावित क्षेत्र की संचार व्यवस्था और बिजली आपूर्ति भी ठप पड़ी है और सूचनाओं का आदान—प्रदान नहीं हो पा रहा है। भले ही आपदा प्रबंधन के रिस्पांस टाइम को लेकर बड़े दावे किए जाते रहे हो लेकिन इस आपदा ने इसकी हकीकत सामने ला दी है। मीडिया कर्मियों की टीमें भी घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी है। कुदरत की इस मार के सामने शासन प्रशासन सभी लाचार हैं तथा मलबे में दबे लोगों के जीवित बचने की भी अब संभावनाएं समाप्त हो चुकी हैं। रेस्क्यू कर निकाले जाने के दावों का सच क्या है कुछ नहीं कह सकते कोई 80 तो कोई 130 लोगों को मलबे से निकालने की बात कह रहा है तो कोई इसे झूठ बता रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here