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दल बदल का जिन्न, फिर बोतल से बाहर आया

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  • 2016 में दल बदल करने वाले विधायक व मंत्री तलब
  • राष्ट्रपति शासन के बाद फिर बहाल हुई थी हरीश सरकार

देहरादून। हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2016 में हुई दल बदल की घटना और सरकार को गिराने का प्रयास करने वाले तत्कालीन मंत्री व विधायकों को सीबीआई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी कर तलब किया गया है। राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने और एक निर्वाचित सरकार को गिराने के प्रयास की इस घटना ने सूबे के राजनीतिक समीकरण को ही बदल कर रख दिया था। 2016 की इस घटना को लेकर अब सीबीआई की सक्रियता को लेकर यह कहा जा सकता है कि दल बदल का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकल आया है।
2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को गिराने के इरादे से पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के नेतृत्व में नौ विधायकों व मंत्रियों द्वारा कांग्रेस का साथ छोड़ दिया गया था। इस दल बदल की घटना ने सूबे की सियासत में ऐसा भूचाल ला दिया था कि भाजपा कांग्रेस की सरकार को तो गिराने में सफल नहीं हो सकी थी लेकिन राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन जरूर लागू कर दिया गया था। यह अलग बात है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हरीश रावत की सरकार फिर बहाल हो गई थी लेकिन कांग्रेस तब से अभी तक इस झटके से उबर नहीं पाई है और उसे हर एक चुनाव में लगातार बड़ी हार का सामना करना पड़ रहा है। सीबीआई कोर्ट द्वारा अब इस मामले से जुड़े नौ विधायकों को नोटिस जारी कर पेश होने और अपना पक्ष रखने को कहा गया है सभी को अलग—अलग नोटिस भेजे गए हैं तथा अलग—अलग दिन बुलाया गया है। बीते कल पूर्व विधायक व वर्तमान में मंत्री सुबोध उनियाल को पेशी पर बुलाया गया था लेकिन वह व्यस्तता का हवाला देकर हाजिर नहीं हुए। वही प्रदीप बत्रा का कहना है कि वह पहले ही अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। देखना हुआ कि दल बदल का यह जिन्न जो एक बार फिर बोतल से बाहर आ चुका है क्या गुल खिलाता है।

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