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आपातकाल भाजपा की उपलब्धि नहीं

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सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के तमाम नेता, मीडिया सेल और उन राज्यों के नेता जहां भी भाजपा की सरकारे है, इन दिनों 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा देश में लागू किए गए आपातकाल का प्रचार प्रसार करने में जुटे हुए हैं तथा देश भर में इसे संविधान हत्या दिवस के रूप में मना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आपातकाल से प्रभावित लोगों से सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करने की अपील कर रहे हैं वहीं गृहमंत्री अमित शाह भी युवाओं को इतिहास पढ़ने की राय दे रहे हैं। 50 साल पहले देश की राजनीति में घटित होने वाली इस घटना के लिए कांग्रेस 1977 में ही माफी मांग चुकी है तथा देश की जनता ने कांग्रेस को बंपर बहुमत से फिर सत्ता में लाकर यह सिद्ध कर चुकी है कि उसने कांग्रेस को इस बड़ी भूल के लिए तभी क्षमा कर दिया था। लेकिन वर्तमान समय में भाजपा 50 साल पूर्व की इस घटना को जिस अंदाज में प्रचारित कर रही है उससे ऐसा लगता है कि जैसे कांग्रेस के कार्यकाल की 50 साल पहले घटित हुई आपातकाल लागू करने की यह घटना उसकी कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हो। हालांकि तब तक भाजपा का जन्म भी नहीं हुआ था। भाजपा नेताओं द्वारा देश में किस तरह की राजनीति की जा रही है? यह सवाल इसलिए अहम हो जाता है क्योंकि 11 साल केंद्रीय सत्ता पर काबिज रहने के बाद भी अगर उसके पास अपनी ऐसी कोई उपलब्धि नहीं है जिसके दम पर वह सत्ता में बनी रह सके तो 50 साल पूर्व की इन आपातकाल जैसी स्थितियों का प्रचार करना और दूसरों की कमियों के बूते सत्ता में बने रहने की नकारात्मक राजनीति ही कहा जा सकता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर पत्रकारों से वार्ता की। जिसमें उन्होंने भाजपा के नेताओं को ललकारते हुए कहा कि भाजपा के यह नेता, नेता नहीं है न ही उनके पास राष्ट्र और समाज के विकास पर कुछ करने और कहने को है। यह तो भाषण कार और कीर्तनकार हैं। सत्ता में है इसलिए सरकारी पैसों पर मंच सज रहे हैं और उनका भाषण और कीर्तन चल रहा है। अभी बीते दिनों हमने देखा था जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका की धरती से राष्ट्रपति ट्रंप ने सीज फायर (युद्ध विराम) की घोषणा की थी। जिसे लेकर देश की आम जनता ने सरकार को आड़े हाथों लिया था। इस दौरान स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उस दौरान की वीडियो भी वायरल हुई जब अमेरिका पाकिस्तान के समर्थन में जंगी बेड़ा भेजने की धमकी दे रहा था और इंदिरा ने युद्ध न रोकने तथा अमेरिका से मुकाबले का सख्ती से ऐलान कर दिया था। तब देशवासियों को इंदिरा की याद क्यों आई थी? इंदिरा गांधी ने अपने शासनकाल में बैंकों के राष्ट्रीयकरण जमीदारी उन्मूलन से लेकर अनेक ऐसे काम किए थे जो देश और समाज के उत्थान में आज भी मील का पत्थर माने जाते हैं। जब पंजाब आतंकवाद की आग में जल रहा था तब ब्लू स्टार जैसा आतंकवाद के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन करने का साहस इंदिरा जैसी नेता ही दिखा सकते थे। भले ही इसकी कीमत इंदिरा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी हो। जलते सिसकते मणिपुर की तस्वीरें भी देश तथा विश्व के लोगों ने देखी थी क्या वह नेता एक बार भी मणिपुर जाने का साहस दिखा सके। आतंकवाद मिटाने के नाम पर सिंदूर पर राजनीति करना भले ही आसान सही लेकिन किसी भी नेता को इंदिरा जैसा बनाना आसान नहीं है। यह आपातकाल के प्रचारक भी जानते है।

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