उत्तराखंड में एक और हेली हादसे में सात लोगों की जान चली गई। गौरीकुंड के जंगलों में हुए इस दुखद हादसे की तस्वीरें अत्यंत भयावह थी। हेलीकॉप्टर पूरी तरह जलकर खाक हो गया था और मृतकों के शवों को पहचानना मुश्किल, इसलिए अब डीएनए टेस्ट से इनकी शिनाख्त के आदेश दिए गए हैं। शत विक्षत शवो को राहत व बचाव दल की टीमों द्वारा समेट कर लाया गया उत्तराखंड की चार धाम यात्रा को शुरू हुई अभी 45 दिन का समय हुआ है अब तक कुल 5 तथा बीते 30 दिनों में यह तीसरी दुर्घटना है। बीते कल हादसे का शिकार हुआ यह हेलीकॉप्टर आयरन एवियशन कंपनी का था। जो केदारनाथ से छह यात्रियों को लेकर गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ था। दुखद यह है कि इस हादसे में एक दो साल के मासूम बच्चे की भी जान चली गई। सवाल यह है कि हम यात्रियों को हर तरह की सुविधा और सुरक्षा की गारंटी तो देते हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह यात्रा राम भरोसे ही चलती रही है। बात सड़कों की हालत की हो या फिर घोड़े खच्चरों की अथवा हेली सेवाओं की। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जान जाने का यह सिलसिला लगातार जारी है। कहीं बस पलट जाती है तो कहीं कार खाई में गिर जाती है कहीं यात्रियों पर पहाड़ से पत्थर गिर जाते हैं और वह मलबे में दबकर मर जाते हैं तो कहीं पुल टूट जाने से रास्ते में फंस जाते हैं तो कहीं फिर हेलीकॉप्टर क्रैश होने से अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। सवाल यह है कि आखिर इस तरह के हादसों में जिन लोगों की जान चली जाती है उनकी मौत का जिम्मेवार कौन है? जिन हेली कंपनियों को चार धाम यात्रा में काम करने का मौका दिया जाता है क्या उनके द्वारा तमाम नियम और शर्तों का सही अनुपालन किया जा रहा है। क्या जो हेलीकॉप्टर इन एवियशन कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे हैं उसकी उम्र और फिटनेस पर नजर जाती है। पता चला है कि कई हेली कंपनियों के द्वारा पुराने और कबाड़ हेलीकॉप्टरों को रिपेयरिंग के बाद इस काम पर लगा दिया जाता है। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है की हेली कंपनियों के द्वारा इन हेलीकॉप्टरों का ऊंची कीमतों पर इंश्योरेंस कराकर इन्हें चलाया जा रहा है और अगर वैसी कोई दुर्घटना भी होती है जैसी कल हुई तो भी इन हेली कंपनियां का कोई नुकसान नहीं होता बीमा की राशि से उन्हें इतना पैसा मिल जाता है जिससे दूसरा हेलीकॉप्टर भी खरीदा जा सके और मरने वालों को मुआवजा देकर भी बच जाए। शासन—प्रशासन और यूकाडा की सीईओ को इन तमाम पहलुओं की जांच करनी चाहिए कि कहीं यह हेली कंपनियां ही तो यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं कर रही है। पता यह भी चला है कि खराब मौसम की जानकारी विभाग द्वारा 1 घंटे देरी से दी गई तब तक यह हेलीकॉप्टर उड़ान भर चुका था। खैर कारण कुछ भी रहा हो पायलट सहित सात लोगों की इस हादसे में दुखद मौत के बाद हेली सेवा की नियमावली और जांच की पुनः जरूरत है। फिलहाल हेली सेवाओं को रोकने से कुछ नहीं होगा। इस तरह की दुर्घटनाओं को आपदा का नाम भी आप नहीं दे सकते हैं यह दुर्घटना मानवीय चूक या गलती ही है। जिसकी भी लापरवाही से इन यात्रियों की जान गई है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी ही चाहिए।




