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राजनीति और महिलाएं

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यूं तो सियासी दलों के नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन शोषण का इतिहास अत्यंत ही पुराना तथा शर्मनाक और घृणित है। लेकिन उत्तराखंड में एक भाजपा नेत्री द्वारा अपनी ही 13 वर्षीय नाबालिक बेटी को हवस के दरिंदो के हवाले किए जाने का जो सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है वह देवभूमि की संस्कृति की आत्मा को झकझोर देने वाली घटना है। एक मंा जिसकी गोद और उसकी मौजूदगी किसी बच्चे की सुरक्षा की सबसे पुख्ता गारंटी होती है अगर वही मां अपनी कम उम्र की नासमझ बेटी को इस तरह के बुरे काम करने के लिए मजबूर कर दे तो फिर किसी भी बच्चे के लिए कोई जगह महफूज भला कैसे हो सकती है। नारी वंदन और बेटी बचाओ का नारा देने वाले नेता ही अगर लड़कियों और महिलाओं के मांस को नोच—नोच कर खाने पर आमादा हो जाए तो फिर उन्हें सिर्फ भगवान ही बचा सकता है। अनामिका नाम की जिस महिला ने अपनी नाबालिक बेटी को जिस तरह अपने कथित प्रेमी और अन्य तमाम लोगों के सामने परोस कर घृणित और अति निंदनीय कार्य किया गया है वह अत्यंत ही गंभीर अपराध तो है ही साथ ही समाज के मुंह पर एक ऐसा दाग है जिसकी न कोई सजा पर्याप्त मानी जा सकती है और न ऐसे पाप कर्मो का कोई प्राश्चियत किया जा सकता है। इस घृणित अपराध को अंजाम देने वाले अब कानूनी गिरफ्त में आ चुके हैं कानून उन्हें क्या सजा देता है आने वाला समय ही बताएगा। इस कुकर्म की जनक रही पीड़िता की मां ही जान सकती है कि उसने अपने किसी स्वार्थ अथवा बेबसी में ऐसा पाप कर्म करना स्वीकार कर लिया। जहां तक राजनीति में सक्रिय होने जाने की लालसा में सेक्स अपराध तक महिलाए पहुंच जाती है। वही जीवन श्ौली में आने वाली दिक्कतों को लेकर इन नेताओं तक पहुंचती हैं लेकिन उन्हें इसकी बड़ी कीमत अपनी इज्जत आबरू देकर चुकानी पड़ती है। उत्तराखंड में अभी बीते दिनों दुग्ध संघ के अध्यक्ष द्वारा एक विधवा महिला के यौन शोषण का मामला सामने आया था। जिसके पीछे महिला को नौकरी दिलाने का भरोसा ही था। अभी मध्य प्रदेश के भाजपा नेता का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह नेशनल हाईवे पर एक महिला के साथ खुलेआम रेप कर रहा था। बताया गया कि यह महिला एक स्कूल में टीचर थी और अपने तबादले को लेकर इन नेता के संपर्क में आई थी। अभी अल्मोड़ा से एक भाजपा नेता द्वारा एक नाबालिक से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था ऐसे ही अन्य मामले में हरिद्वार के एक भाजपा नेता का नाम सुर्खियों में रहा था बात चाहे उत्तराखंड की हो या फिर तमिलनाडु की तमाम ऐसे केस बीते कुछ ही सालों में सामने आ चुके हैं। जो भाजपा नेताओं की कलंक कथा की कहानियों से जुड़े हुए हैं। जिस अंकिता भंडारी केस ने उत्तराखंड की राजनीति को हिला कर रख दिया था उसके आरोपी सत्ता पक्ष जुड़े रहे हैं। यही नहीं इस केस में अंकिता पर जिस वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने के लिए दबाव बनाने की बात सामने आई थी वह भी भाजपा का बड़ा पदाधिकारी बताया जाता है यह अलग बात है कि अब तक तमाम राजनीतिक दबावो के कारण उसके नाम का खुलासा नहीं हो सका है और उसे बचा लिया गया है। कुल मिलाकर बीते सालों में जिस तरह भाजपा से जुड़े नेताओं के सेक्स कांड सामने आए हैं वह यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा के राज में महिलाओं के यौन शोषण की घटनाएं किस कदर बढ़ी हैं। देश के 151 सांसद और विधायकों पर महिलाओं के यौन शोषण के मामले उनके चाल चरित्र की गवाही देने के लिए काफी हैं। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा पर तो सवाल है ही साथ ही महिलाएं भी खुद सवालों के घेरे में है।

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