जी हां यही आपका नया भारत, बदलता भारत और महान भारत है जिसका ढिंढोरा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व 2014 के चुनाव के बाद से लगातार पीटता चला आ रहा है। भाजपा नेताओं ने देश की संवैधानिक व्यवस्थाओं में फेर बदल के जरिए बीते 10 सालों में सत्ता का रुख अपनी ओर मोड़ लिया है। सत्ता की अतिवादी नीतियों ने संविधान व लोकतंत्र तथा उन सभी संवैधानिक स्थानों को हैक कर लिये जाने से सत्ता लगातार अपनी मनमानियों के दम पर आगे बढ़ता दिख रहा है। और उसे ऐसा करने से कोई रोक भी नहीं पा रहा है जो न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि चिंताजनक ही है। गोधरा अग्निकांड के बाद गुजरात में घटित होने वाली तथा महिलाओं के सम्मान को तार—तार करने वाली घटनाओं को भारत देश के लोग कैसे भूल सकते हैं जब बिलकिस बानो के दोषियों को जेल से रिहा कर दिया जाता है तथा इस रिहाई का जश्न उन्हें फूल मलायें पहना कर किया जाता है इससे बड़ी शर्मसार करने वाली कोई दूसरी घटना भला क्या हो सकती है। अभी बीते दिनों उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी मामले में सरकार ने हर संभव तथ्य को नकारने की कोशिश की गई कि यह पेपर लीक घटना नहीं है और जब आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया तो सरकार द्वारा इसकी सीबीआई जांच की संस्तुति की गई। अंकिता भंडारी मर्डर केस की फाइल चींख—चींख कर पहले ही दिन से यह कह रही है कि उसमें अन्य उनसे अधिक लोगों की संलिप्तता थी। जबकि सरकार उन्हें बचाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाए हुए हैं लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है कि हां अगर कोई वीआईपी इसमें संलिप्त है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अब तक इसकी निष्पक्ष जांच को लेकर तीन नेताओं के इस्तीफे भी हुए हैं फिर भी सरकार हठ धर्मिता छोड़ने को तैयार नहीं है बिना इसकी सीबीआई जांच करा कर अब इसका समाधान संभव नहीं है। लेकिन एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुके इस केस में सरकार अपनी पूरी छीछालेदर करने को तैयार नहीं है। आज हमारे दिमाग में एक और बात आ रही है कि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार द्वारा क्या मोदी सरकार को इसलिए समर्थन दिया गया था कि वह अपनी मनमानी करते रहें। भले ही 2014 और 2019 में भाजपा को अपने दम पर दो बार सरकार बनाने का मौका मिला हो लेकिन 2024 में तो जनता ने उसे सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। आज देश के युवाओं और आधी आबादी में अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए जो सवाल खड़े हो रहे हैं वह चंद्रबाबू नायडू व नीतीश के कारण ही दिखाई दे रहे हैं। नीतीश बाबू को तो न तो चुनाव आचार संहिता के दौरान उनके राज्य की महिलाओं को 10—10 हजार कैश देकर उनके वोट खरीदने का काम किया गया उसमें उन्हें कोई भी बुराई दिखी होगी न ही उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा इस बयान पर कोई शर्मिंदगी महसूस हुई होगी जिसमें उन्होंने कहा है कि बिहार में 20—30 हजार में लड़कियां मिलती है चाहे जितनी खरीद लो। धन्य है इस देश के नेता जिन्हें किसी बात पर कोई शर्मिंदगी ही नहीं। ऐसे नेताओं को देश का युवा कब सबक सिखाएगा यह आने वाला समय ही बताएगा।




