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शासन—प्रशासन कानून व्यवस्था में फेल

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  • हत्या—लूट जैसी वारदातों का सिलसिला जारी

देहरादून। उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर उठ रहे तमाम सवालों के बीच और शासन—प्रशासन के प्रयासों तथा दावों के बीच बढ़ती अपराधिक घटनाएं इस बात का प्रमाण है कि स्थिति बजाय सुधारने के दिनों—दिन और भी अधिक खराब होती जा रही है। खास तौर पर सूबे की राजधानी दून में तो अपराधिक घटनाओं ने सारे रिकॉर्ड ही तोड़कर रख दिए हैं। आज सुबह राजपुर रोड क्षेत्र में सुबह सवेरे मॉर्निंग वॉक पर गए सेवा निवृत ब्रिगेडियर की हत्या ने एक बार फिर शासन—प्रशासन के दावों की कलई खोल कर रख दी है।
दून की कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए पुलिस कप्तान का तबादला कर दिया गया था। बीते माहं फरवरी में एक के बाद एक पांच हत्याओं की घटनाएं जिसमें दिन—दहाड़े मच्छी बाजार में एक युवती पर चापड़ से वार करते हुए मौत की नींद सुला देने की सनसनीखेज वारदात भी शामिल थी जिसने सभी को चौंका दिया था। बजट सत्र में विपक्ष के कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरे जाने के बाद पुलिस—प्रशासन ने कुछ सख्ती तो दिखाई लेकिन इस सख्ती का भी कोई असर नहीं होता दिख रहा है। अभी पुलिस अभिरक्षा में एक पीआरडी जवान की खुदकुशी से लेकर हत्या तथा लूटपाट की घटनाओं का सिलसिला थमता दिखाई नहीं दे रहा है। अभी बीते दिनों चूना भट्ठा पर एक और युवती का शव बरामद होना तथा दो दिन पूर्व शाम के 4 बजे नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में एक वृद्धा की चेन स्नेचिंग की घटना यह बताती है कि अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं है।
खास बात यह है कि पुलिस इन तमाम जघन्य अपराधों में से कुछ का ही खुलासा कर सकी है उस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार और पुलिस के लिए सूबे की कानून व्यवस्था को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन चुका है वही आम आदमी दहशत के साये में जीने पर विवश है।

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