भले ही सूबे की सरकार 2027 में फिर एक बार भाजपा की सरकार का सपना संजोए बैठी हो और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपनी हरिद्वार रैली के जरिए समय पूर्व ही चुनावी शंखनाद का आगाज कर गए हो लेकिन भाजपा के अंदर लंबे समय से जो आंतरिक अंतर्द्वंद की स्थिति बनी हुई है वह न तो किसी से छिपी है और न भाजपा के लिए लगातार तीसरी बार जीत कर सत्ता में बने रहने का यह टारगेट इतना आसान है। दो धड़ों में बटी प्रदेश भाजपा के बारे में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जो किसी से छिपा हो। राज्य सरकार जो अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर चुकी है भले ही स्थिर दिखाई देती हो और अब सभी को ऐसा लग रहा हो कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही आगामी विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा। लेकिन इस सरकार के गठन से लेकर अब तक खाली पड़े कैबिनेट मंत्री पदों का न भरा जाना और कार्यकर्ताओं को उत्तरदायित्वों का बंटवारा न किया जाना इस बात का साक्ष्य है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भले ही अमित शाह ने अपने संबोधन में इस बात का एहसास न होने दिया हो लेकिन हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा संसद में खनन की अवैधता पर उठाए गए सवालों के बाद भाजपा की खेमेबाजी सतह पर आ गई थी। अब रही सही कसर अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अजय अजेंद्र ने साफ कर दिया है जो पीएम मोदी को संबोधित करते हुए अपने अंदर की उसे घुटन का खुलासा करने में कोई संकोच नहीं करते हैं कि अब उनके जैसे कार्यकर्ताओं के पास ऐसी राजनीति को तिलांजलि देना ही अंतिम विकल्प बचा है। वह अपनी इस पोस्ट में साफ—साफ कहते हैं कि भाजपा द्वारा गलत नीतियों पर चलने वालों को संरक्षण प्रदान करने का काम किया जा रहा है। भले ही उनके इस पोस्ट पर जो कि उनके द्वारा सोशल मीडिया हैंडल पर किया गया है उसके कुछ भी मायने निकाले जाएं लेकिन एक बात साफ है कि अब भाजपा के नेताओं के अंदर की कशिश भी बाहर आने लगी है। बात पेपर लीक और रोजगार के मुद्दे की हो या फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मुद्दों की हो अथवा धर्म आधारित राजनीति की जिसके तहत मुख्यमंत्री धामी गर्व के साथ सदन में यह बताते हैं कि वह राज्य की बायोग्राफी को चेंज नहीं होने देंगे और धर्म की आड़ में राज्य की कब्जाई गई 1200 एकड़ जमीन को उन्होंने अवैध कब्जों से मुक्त कराया है। लेकिन जिन पेपर लीक और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों में सरकार के बैक फुट पर आना पड़ा है तथा सीबीआई जांच की संस्तुति करनी पड़ी है उससे भाजपा की छवि को कितना नुकसान हुआ है इसका आकलन संभव नहीं है। यही नहीं गैरसैंण राजधानी जैसे मुद्दों पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान जिसमें वह विधानसभा भवन को ही वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने का सुझाव देते हैं भाजपा को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है सीएम धामी चुनाव तक अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे या नहीं यह दीगर बात है लेकिन 2027 का चुनाव उनके लिए आसान नहीं है।




