बीते 10 सालों में मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ट्टन खाता न बही जो सरकार कहे वही सही, की नीतियों पर चलते हुए जिस तरह काम किया गया वह अब आगे किसी भी कीमत पर चलने वाला नहीं है। क्योंकि अब सरकार के सामने एक ऐसा मजबूत विपक्ष बैठा है जो उसे मनमानी नहीं करने देगा। यह बात संसद के पहले ही सत्र में साफ हो चुकी है। राहुल गांधी के भाषणों के दौरान सफाईयां पेश करने के लिए दंड बैठक करने वाले मंत्रियों और अखिलेश द्वारा सदन में साफ—साफ यह कहे जाने कि अब सरकार मनमर्जी से नहीं जनमर्जी से चलेगी यह साफ हो गया है कि सरकार की तानाशाही के दिन अब लद चुके हैं। विपक्ष द्वारा इस चुनाव में जिन मुद्दों को उठाया गया था अब उन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष की बखिया उधेड़ना शुरू कर दिया गया है। बात चाहे उस योजना की हो जिसे अग्निपथ के नाम से सरकार ने लांच किया था या पेपर लीक और बेरोजगारी की। खास बात यह है कि विपक्षी नेताओं की गलतियां गिनाने व उन्हें बालक बुद्धि की गलतियां न समझ कर ईंट का जवाब ईंट से देने की बात करने वाली सरकार ने अब अपने गलत फैसलों पर लीपा पोती का काम शुरू कर दिया है क्योंकि उनके पास अपने गलतियों को सही ठहराने का कोई जरिया ही नहीं बचा है। जिस अग्निवीर के मुद्दे पर संसद में राहुल गांधी और राजनाथ सिंह (रक्षा मंत्री) के बीच तीखी झड़पे हुई थी उस अग्नि वीर योजना पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सभी पांच प्रमुखों द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी देने के नियमों में बदलाव करने की घोषणा की गई है। सभी अर्धसैनिक बलों में अब अग्निवीरों के लिए 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा तथा उन्हें आयु सीमा में छूट भी देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा संसदीय समिति की बैठक में इस बात की भी सिफारिश की गई है कि रेगुलर सैनिकों की तरह अग्निवीरों को शहीद होने की स्थिति में वही सब सहुलियतेे मिलनी चाहिए जो रेगुलर सैनिकों को मिलती है। इस बात का सीधा अर्थ यही है कि विपक्ष के दबाव के कारण आखिर सरकार को यह मानने पर मजबूर होना ही पड़ा है कि सेना में दो तरह के शहीद नहीं हो सकते या नहीं होने चाहिए। जबकि अग्निवीर के शहीदी के स्थिति में पहले तो इन्हें शहीद ही नहीं माना जा रहा था एक रेगुलर सैनिक को उसके अंतिम वेतन के बराबर पेंशन आजीवन दी जाती है लेकिन अग्नि वीर को किसी भी तरह की पेंशन नहीं दी जाती है शहीद सैनिक को जिस तरह वीर चक्र से सम्मानित किया जाता है वैसे अग्नि वीरों के लिए किसी चक्र को देने का प्रावधान नहीं था एक रेगुलर सैनिक को लगभग 30 प्रकार की तमाम सुविधाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और यात्राओं से लेकर कैंटीन आदि की सुविधा दी जाती है लेकिन अग्नि वीरों के लिए ऐसा कुछ नहीं है। क्या किसी भी देश में सैनिकों के लिए दो तरह के मापदंड उचित हो सकते हैं तथा इसका सैनिकों के मनोबल पर क्या प्रभाव पड़ता है। भले ही पहले सत्ता में बैठे लोगों को यह बात समझ में न आई हो लेकिन अब उन्हें यह अच्छे से समझ आ गया है कि यह फैसला गलत था। विपक्ष जो सत्ता में आने पर अग्नि वीर योजना को रद्द करने की बात कह रहा है, की तरह सरकार अब इसे रद्द करने का साहस तो दिखा नहीं सकती है इसलिए अब योजना के नियम बदलकर अपनी गलती पर लीपा पोती तो कर ही सकती है।



