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रिजार्ट या अपराध के अड्डे

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बीते कल उत्तरकाशी के काफलो गांव के एक रिजार्ट में 19 वर्षीय युवती अमृता का शव मिलने का जो मामला सामने आया है उसने एक बार फिर वनंत्रा रिजार्ट में हुए अंकिता मर्डर केस की यादों को ताजा कर दिया है। अंकिता भंडारी की तरह अमृता भी रिजार्ट में काम करती थी और पास के ही गांव की रहने वाली थी। इस रिजार्ट के मालिक ने स्वयं फोन कर उसके फांसी लगाने की सूचना पुलिस को दी गयी। मौके पर पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने अमृता को कमरे में फांसी के फंदे पर लटके देखा। परिजनों का कहना है कि उसके पैर फर्श पर टिके हुए थे उसने खुद आत्महत्या नहीं की है बल्कि उसकी हत्या की गई है। अमृता ने भले ही खुद आत्महत्या की हो या फिर उसकी हत्या की गई हो लेकिन आत्महत्या या हत्या करने के पीछे कोई न कोई ठोस वजह होना भी लाजमी है। पुलिस अब इसकी जांच में जुटी हुई है। इस जांच में क्या कुछ सामने आता है यह अलग बात है लेकिन देवभूमि में बेटियों के साथ कार्य स्थलों पर क्या कुछ हो रहा है? और वह कितनी सुरक्षित है? प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन के साथ उन तमाम लोगों के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है जिनकी बेटियंा घर से बाहर जाकर कहीं भी नौकरी कर रही हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद शासन स्तर पर जिस तरह रिजार्ट होमस्टे और होटल तथा रेस्टोरेंटों को पर्यटन के मद्देनजर बढ़ावा दिया जा रहा है वह ठीक है लेकिन खास तौर पर इन रिजार्ट और होमस्टे में हो क्या रहा है इस पर भी नजर रखे जाने की जरूरत है। बीते कल ही रामनगर स्थित एक रिजार्ट में पुलिस द्वारा छापेमारी कर भारी मात्रा में शराब बरामद की गई। पुलिस का कहना है कि यहां अवैध तरीके से लोगों को शराब पिलाये जाने की शिकायतें मिल रही थी। अंकिता मर्डर केस में गवाहों के बयानों से यह बात सामने आ चुकी है कि रिजार्ट का मालिक और मैनेजर अंकिता का शारीरिक शोषण करते थे और घटना वाले दिन किसी वीआईपी गेस्ट को स्पेशल सर्विस देने का दबाव उस पर बनाया जा रहा था। उससे भी खास बात यह है कि अंकिता भंडारी के परिजन और विपक्ष तथा वह तमाम सामाजिक संगठन जो अब तक इस घटना को लेकर आंदोलित है अंकिता को न्याय नहीं दिला सके हैं। मध्य सितंबर 2020 की इस घटना को लेकर अंकिता के गरीब मां—बाप दर—दर की ठोकरे खा रहे हैं लेकिन इंसाफ की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है क्योंकि आरोपी पक्ष रसूखदार और सत्ताधारी दल से संबंध रखते हैं। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पहाड़ के गरीब परिवारों की जो लड़कियां काम की तलाश में ऐसे रिजार्ट में नौकरी करने के लिए मजबूरीवश ही पहुंचती है जिसे पूंजीपति रिजार्ट के मालिक अच्छी तरह से जानते हैं उन्हें पता होता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। यही कारण है कि आए दिन रिजार्ट में काम करने वाली बेटियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। अमृता के बारे में यह बात सामने आई है कि परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण ही वह इस रिजार्ट में काम कर रही थी। अगर उसने आत्महत्या की तो भी यह सामने आना चाहिए कि उसके सामने वह ऐसे क्या हालात थे जिसके कारण उसे अपनी जान देने पर आमादा होना पड़ा और अगर किसी ने उसकी हत्या करने के बाद उसे फांसी के फंदे पर लटका कर इसे आत्महत्या साबित करने का प्रयास किया है तो वह अपराधी कौन है और उसने किस कारण से यह अपराध किया है, इसका पूरा सच सामने आना चाहिए। शासन—प्रशासन को ऐसे किसी भी मामले को अत्यंत ही संजीदगी से लेना चाहिए अन्यथा इस तरह के मामले बढ़ते ही जाएंगे। यह सिर्फ कानून व्यवस्था पर ही सवाल नहीं है बल्कि पहाड़ की बेटियों की इज्जत से जुड़ा हुआ सवाल है ऐसी वारदातों पर तत्काल लगाम लगाने की जरूरत है जिससे देवभूमि की बेटियों व संस्कृति को सुरक्षित रखा जा सके।

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