May 1, 2026पिथौरागढ़। नाजायज सम्बन्धों के शक के चलते एक व्यक्ति ने आवेश आकर अपनी पत्नी की कुल्हाड़ी से काट कर हत्या कर दी गयी। हत्या के बाद हत्यारा पति खुद थाने पहुच गया जहंा उसके द्वारा आत्मसर्मपण कर दिया गया। वहीं पुलिस ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए तत्काल मौके पर पहुच कर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी बरामद कर ली है।हत्या का यह मामला जनपद पिथौरागढ़ के अस्कोट क्षेत्रांर्तगत ग्राम द्वालीसेरा का है। यहंा आज सुबह भुवन प्रसाद (42) निवासी ग्राम द्वालीसेरा द्वारा अपनी पत्नी गीता देवी (उम्र 38 वर्ष) की कथित अवैध संबंधों के शक में कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी गई।घटना के बाद आरोपी स्वयं चौकी पीपली पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। वहंीं मामले की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष सुरेश कम्बोज मय पुलिस टीम मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा मृतका का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम हेतु जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ भेजा गया। वहीं पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी बरामद कर ली है। वहीं इस दुस्साहसिक घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस व फॉरेंसिक टीम द्वारा मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किये गये है। वहीं आरोपी को मेडिकल के बाद न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
May 1, 2026हरिद्वार। घर से नाराज होकर लापता चल रहे किशोर का शव आज सुबह नहर में मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है।मामला ज्वालापुर क्षेत्र के कोटरवान क्षेत्र का है। यहंा रहने वाले 17 वर्षीय किशोर फराज पुत्र फरमान का शव नहर में मिलने से परिजनों में कोहराम मच गया। किशोर बीते 27 अप्रैल की रात को परिजनों से किसी बात को लेकर नाराज होकर घर से चला गया था। इसके बाद परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग सका।मामले की सूचना ज्वालापुर पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने किशोर की तलाश के लिए आसपास के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान किशोर बाल्मीकि बस्ती तक जाता हुआ दिखाई दिया, लेकिन इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चल पाया। आज सुबह किशोर का शव बहादराबाद स्थित पथरी पावर हाउस के पास नहर में मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नहर से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। बताया जा रहा है कि किशोर की परिजनों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी, जिसके बाद वह घर से निकल गया था। वहीं, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
April 30, 2026मारे गये बदमाश की आज कोर्ट में थी तारीख दून में बलात्कार, हत्या, डकैती की घटनाओं को दिया था अंजाम देहरादून। बदमाश अकरम ने दून में बलात्कार, हत्या व डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया था। कोर्ट में पेशी के लिए आने से पहले लूट की घटना को अंजाम देने के बाद पुलिस ने उसे मुठभेड में मार गिराया।आज यहां इसकी जानकारी देते हुए आईजी राजीव स्वरूप व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि गत रात्रि प्रेमनगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि बदमाशों ने पौंधा रोड पर एक व्यक्ति को गोली मारकर लूट की घटना को अंजाम दिया है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बदमाशों का पीछा किया तो थोडी दूरी पर पुलिस को काले रंग की कार दिखायी दी। पुलिस ने पीछा किया तो बदमाश कार को छोडकर जंगल में भागने लगे। पुलिस को देखकर बदमाशों ने पुलिस पर फायर झोंक दिया जिससे प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर घायल हो गये। पुलिस की जवाबी कारवाही में एक बदमाश को गोली लग गयी। जिसको अस्पताल पहुंचाया गया जहां चिकित्सकों ने उसको मृत घोषित कर दिया। मारे गये बदमाश की पहचान अकरम पुत्र मासूम निवासी ग्राम बंूटा थाना गढी पुख्ता भवन जिला शामली के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार अकरम ने अपने साथियों के साथ 2014 में बालावाला में एक घर में डकैती की घटना को अंजाम दिया था जिसमें विरोध करने पर उसके द्वारा अंंकित थपलियाल की हत्या कर दी गयी थी। जिसमें उसके फरार होने पर पुलिस ने उस पर 50 हजार रूपये का ईनाम घोषित किया था। घटना के तीन वर्ष बाद 2017 में अकरम को पुलिस ने मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया था। मृत बदमाश अकरम पर उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश में हत्या, लूट, बलात्कार सहित संगीन अपराधों के एक दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज है तथा शामली पुलिस द्वारा वर्तमान में उस पर पांच हजार रूपये का ईनाम घोषित किया गया है। आज अकरम की दून न्यायालय में तारीख थी। तारीख पर पेश होने के लिए वह यहां आया था तथा लूट की घटना को अंजाम दिया। जिसके बाद पुलिस मुठभेड में मारा गया। एसएसपी ने बताया कि बदमाशों की गोली से घायल प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर को चिकित्सकों ने खतरे से बाहर बताया है।
April 30, 2026जम्मू। श्रीनगर साइबर पुलिस ने पीडीपी लीडर इल्तिजा मुफ्ती और दूसरों के खिलाफ अलगाववादियों से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट को कथित तौर पर सर्कुलेट करने के लिए एक एफआईआर दर्ज की है, जिसमें दिवंगत अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का एक वीडियो भी शामिल है। यह मामला अलगाववादी विचारधारा और गलत जानकारी को बढ़ावा देने वाले वीडियो से जुड़ा है, जिसका मकसद भारत की संप्रभुता, शांति और अखंडता को नुकसान पहुंचाना है।एक पुलिस सोर्स ने बताया कि एफआईआर उन लोगों को टारगेट करती है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गैर—कानूनी गतिविधियों, लोगों में अशांति फैलाने और देश की एकता को कमजोर करने वाला कंटेंट शेयर करते हैं। शुरुआती जांच से पता चलता है कि जानबूझकर बांटने वाली सोच फैलाने की कोशिश की गई थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (ठछै) की धारा 152, 196(1), और 353(1)(इ), (ब), (2) के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो संप्रभुता को खतरे में डालने और देशद्रोह जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कामों को कवर करते हैं। इसे फैलाने के इरादे और पहुंच का पता लगाने के लिए श्रीनगर के साइबर पुलिस स्टेशन में जांच चल रही है।यह कार्रवाई इल्तिजा मुफ्ती के एक्स पोस्ट के बाद हुई, जिसमें उन्होंने गिलानी का एक पुराना वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने उनकी विचारधारा से असहमति जताई थी, लेकिन हाल के भाषा विवाद के विरोध प्रदर्शनों के बीच उर्दू के महत्व पर उनके विचारों को हाईलाइट किया था। पुलिस इसे एक बैन संगठन के अलगाववादी का महिमामंडन मान रही है। ऑनलाइन सामग्री को बढ़ावा देने के लिए अज्ञात लोगों का भी नाम लिया गया है। अधिकारियों ने जनता से सोशल मीडिया पर इस तरह की गैर—कानूनी सामग्री बनाने या शेयर करने से बचने की अपील की है, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
April 30, 2026डीएम की सख्ती से जिले में 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त, शेष पर कार्रवाई जारी देहरादून। मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी सविन बसंल को प्रेषित रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में चिन्हित कुल 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों पर कार्रवाई प्रगति पर है।आज यहां जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जनपद के जर्जर एवं निर्जीर्ण विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तेज गति से संचालित किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी को प्रेषित रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में चिन्हित कुल 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों पर कार्रवाई प्रगति पर है। जिलाधिकारी के सख्त रूख कड़े निर्देश पर 64 जर्जर विद्यालय भवन निष्प्रोज्य ध्वस्त किए गए है। तथा शेष 8 निष्प्रोज्य भवन 1 माह के भीतर ध्वस्त कर दिए जाएंगे। इस सम्बन्ध में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी को अपनी आख्या प्रस्तुत की है। जिले में 04 माध्यमिक तथा 52 प्रारम्भिक विघालयों के भवनों का ध्वस्तीरकण किया जा चुका है। इसी प्रकार विघालयों में पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों में माध्यमिक विद्यालय के 07 तथा प्रारम्भिक विद्यालय 10 कक्ष में से 14 का ध्वस्तीकरण किया गया है। तथा 03 निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों को एक माह के भीतर ध्वस्त कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी की सख्ती से जिले के जर्जर पड़े सैकड़ो स्कूल भवन पहलीबार एक साथ ध्वस्त किए गए है।जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों की नकेल कसने पर जर्जर भवन के चिन्हिकरण एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही हुई है। जिले के विकासखण्ड चकराता में 23, कालसी में 17, विकासनगर में 8, सहसपुर में 2, रायपुर में 14, डोईवाला में 17 विघालय भवन चिन्हित किए गए थे। जिनमें में से कुल 70 विघालय भवनों एवं विद्यालय कक्षों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है, शेष जिन विद्यालय भवनों एवं विघालय कक्षों ध्वस्तीकरण विभिन्न कारणों से पूर्ण नहीं हो पाया है, ऐसे 11 पूर्ण एवं आंशिक रूप से निर्जीर्ण भवनों को ध्वस्तीकरण हेतु एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि विघार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जर्जर भवनों को शीघ्र हटाकर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा शिक्षण कार्य बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। जिला प्रशासन ने जनपद के सभी जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर लिया गया है। विघार्थियों की सुरक्षा के साथ—साथ उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च जिम्मेदारी है, जिसके लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी निर्देशित किया गया हैै। शेष भवनों पर भी शीघ्र कार्रवाई पूरी की जाएगी।
April 30, 2026चुनावी रंण में एक अदृश्य जंग सोशल मीडिया पर भी दिखेगी मतदाताओं की सोच प्रभावित कर चुनावी रणनीति का केंद्र बनेगा सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण का बनेगा एक बड़ा साधन पार्टियां कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मैनेजमेंट पर कर रही निवेश देहरादून। सूबे में आगामी विधानसभा चुनाव में जहां एक ओर रैलियां, जनसभाएं और रोड शो दिखेगा। वहीं दूसरी ओर एक अदृश्य जंग सोशल मीडिया पर लड़ी जाएगी। विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भले ही आंखों से दिखाई न दे, लेकिन इसका प्रभाव बेहद गहरा हो सकता है। यह न केवल मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर रहा है, बल्कि चुनावी रणनीति का केंद्र भी बन सकता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार की असली जंग सड़कों के साथ-साथ स्क्रीन पर भी लड़ी जाएगी है। इस यु( में पक्ष और विपक्ष की अग्नि परीक्षा होना लाजमी है।बता दें कि सोशल मीडिया के युग में अदृश्य चुनावी यु( न हो यह हो ही नहीं सकता है। राजनीतिक दल अब सोशल मीडिया को सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्म पर माइक्रो-टारगेटिंग के जरिए अलग-अलग वर्गों तक अलग संदेश पहुंचाया जाएगा है। युवा, महिलाएं और पहली बार वोट देने वाले मतदाता इस डिजिटल अभियान के मुख्य केंद्र में हैं। छोटे-छोटे मैसेज, वीडियो क्लिप और ग्राफिक्स के जरिए राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी कहे जाने वाले इस अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए सूचनाएं तेजी से फैलती हैंकृचाहे वह सही हों या भ्रामक। यही कारण है कि सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण का एक बड़ा साधन बनेगा है।सोशल मीडिया की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह उन मतदाताओं तक भी पहुंच बना लेता है जो सार्वजनिक रूप से अपनी राय जाहिर नहीं करते। घर-घर तक पहुंचने वाले मोबाइल फोन और सस्ते इंटरनेट ने साइलेंट वोटर को सीधे राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनते है। नेताओं की छवि गढ़ने और विरोधियों के खिलाफ माहौल बनाने में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है। एक वायरल वीडियो या पोस्ट कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंचकर धारणा बदल सकता है। यही वजह है कि पार्टियां अब कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मैनेजमेंट पर भारी निवेश कर रही हैं।सोशल मीडिया पर जहां राष्ट्रीय मुद्दे तेजी से ट्रेंड करते हैं, वहीं स्थानीय समस्याओं को भी अब डिजिटल मंच मिल गया है। गांव की सड़क, पानी या रोजगार से जुड़ी समस्याएं भी वायरल होकर बड़े मुद्दे बन सकते हैं, जिससे चुनावी एजेंडा प्रभावित होता है। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों को डिजिटल माध्यम से प्रचारित कर रहा है, वहीं विपक्ष इन प्लेटफार्म्स का उपयोग सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए कर रहा है। दोनों के बीच यह डिजिटल मुकाबला चुनाव से पूर्व ही तेज हो गया है।राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो आम मतदाता को आगामी विधानसभा चुनाव में ‘डिजिटल कुरुक्षेत्र’ के बारे में पूरी जानकारी रखनी होगी। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा तो नहीं की है, लेकिन अभी से सर्तक और जानकारी पूरी रखनी मतदाता की भी जिम्मेदारी है। क्योंकि वर्तमान जो दौर चल रहा है उससे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाता को ही नुकसान गलत पार्टी या नेता चुनकर हो सकता है। चुनाव अभी दूर है और सोशल मीडिया पर अभी से अदृश्य चुनावी वार चलने लगा है। इसलिए अभी से सावधान रहें।