- सूबे का सियासी तूफान, कुछ तो गुल खिलाएगा?
- सरकार से लेकर संगठन तक होगा बड़ा बदलाव
- भाजपा के नेताओं में मचा है हड़कंप
- सवालों का जवाब ढूंढने में जुटे हैं सभी नेता
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की शांत और शीतल वादियो में इन दिनों आए सियासी तूफान ने नेताओं की नींद हराम कर दी है। प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद के बीच प्रेमचंद और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ के व्यावसायिक रिश्तो से जुड़े एक पत्र के वायरल होने तथा राज्य में बन रहे पांचवें धाम ट्टसैन्य धाम’ के निर्माण में घोटाले के आरोपों ने भ्रष्टाचार के मुद्दों को पंख लगा दिए हैं। तथा अब कई और मंत्रियों पर गाज गिरने की चर्चाएं आम हो चली है।
प्रेमचंद की कुर्सी तो जा चुकी है क्या अभी कुछ और मंत्रियों की कुर्सी भी जाने वाली है यह पहला सवाल है दूसरा सवाल यह है कि मंत्रिमंडल विस्तार में किसे मंत्री बनाया जा सकता है और किसे नहीं? तीसरा सवाल है कि पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को बदला जाएगा या पहले मंत्रिमंडल में बदलाव होगा इसके बाद नए अध्यक्ष की ताजपोशी होगी।
चौथा सवाल यह है कि क्या यह बदलाव सरकार के 3 साल पूरा होने के जश्न के बाद होने वाला है। पांचवा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री धामी पार्टी की चुनाव से पूर्व सीएम बदलने की रवायत को तोड़ेंगे या पार्टी उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखाकर उनकी जगह भी किसी अन्य चेहरे को सीएम की कुर्सी पर विराजमान करने वाली है। भले ही धामी ने अब तक कुछ भी बेहतर काम किए हो लेकिन बीसी खंडूरी से लेकर त्रिवेंद्र रावत तक भाजपा ने कई सीएम बदलने की एक ऐसी रवायत पेश की है वह यही बताती है कि भाजपा एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है जिसमें कभी भी कुछ भी संभव है।
उक्त सभी सवालों से इन दिनों देवभूमि की सत्तारूढ़ पार्टी का हर नेता जूझ रहा है। तमाम मंत्री इसलिए परेशान है कि कहीं उन्हें हटा तो नहीं दिया जाएगा। विधायक इसलिए तनाव में है कि उनको मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या नहीं। मुख्यमंत्री के सम्मुख नित नई चुनौतियां उनके अपने ही मंत्री और विधायकों द्वारा पेश की जा रही हैं। जिन्हें रोक पाने और डैमेज कंट्रोल में अब वह सफल होते नहीं दिख रहे हैं। इससे पूर्व अपने दोनों ही कार्यकाल में एक साथ इतनी चुनौतियां कभी उनके सामने नहीं रही है जितनी की वर्तमान समय में देखी जा रही है। इसके ऊपर विपक्ष कांग्रेस और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा जिसका अभी—अभी गठन किया गया है के द्वारा एक के बाद एक ऐसे तीखे हमले किए जा रहे हैं कि उनका कोई जवाब देते सरकार को नहीं बन रहा है। सूबे की राजनीति में मची इस उथल—पुथल का अंतिम नतीजा क्या रहेगा इसका जवाब अभी किसी राजनीति के पंडित के पास भी नहीं है लेकिन यह तय है कि कुछ बड़ा ही होने वाला हैै।




