जनगणना एक राष्ट्रीय जरूरत है। देश की वर्तमान समय में जनसंख्या कितनी है इसका ठीक ठीक पता किसी को भी नहीं है। नेताओं द्वारा अपने भाषणों में कभी सवा सौ करोड़ तो कभी 140 करोड़ तो कभी इससे भी अधिक होने की बात की जाती रही है। अभी बीते दिनों समाचार में आया था कि भारत ने जनसंख्या में चीन को पछाड़ दिया है तथा भारत विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। देश की जनसंख्या का सही आंकड़ा सही मायने में पूर्व समय में कराई गई तमाम जनगणना में से किसी में भी सटीक आंकड़े नहीं मिल सके है जिसका करण जनसंख्या की गणना पद्धतियों की खामियां रही हैं। हर एक 10 साल के अंतराल पर जनगणना तो होती रही लेकिन इसमें इतनी तकनीकी और मानवीय त्रुटियां रही है कि इन्हें सिर्फ एक खाना पूर्ति ही कहा जा सकता है इसलिए इसका सही अनुमान लगाया जाना संभव है ही नहीं। अब सरकार ने जनगणना कराने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार की जाने वाली जनगणना न सिर्फ डिजिटल होगी अपितु इसमें जातियों की जानकारी से लेकर हर परिवार की संपूर्ण आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति का ब्यौरा भी एकत्रित किया जा सकेगा। जिससे ऐसे कई सवालों का जवाब भी मिल सकेगा कि देश के आम आदमी की माली हालत क्या है कितने लोगों के पास रोजगार है तथा कितने बेरोजगार है। गरीबी—अमीरी के साथ—साथ उनको मिलने वाली शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य तमाम जरूरी जरूरतों की क्या स्थिति है कितने लोगों के पास अपना घर है तथा कितने लोग बेघर हैं? राष्ट्रीय सेवाओं में किस जाति धर्म के लोगों की कितनी भागीदारी है और कितने लोगों के घर तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है और कितने लोग सामाजिक उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। प्रति व्यक्ति आय की क्या स्थिति है। सही मायने में किसी भी देश का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है जब तक सभी जाति धर्म और वर्ग तथा क्षेत्र के लोगों को सरकारी योजनाओं का सामान रूप से लाभ नहीं पहुंचता। सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए तमाम योजनाएं चलती तो रही है लेकिन आजादी के बाद भी अगर कुछ लोग विकास के शिखर पर पहुंच गए हैं और कुछ लोग गरीबों की अंधेरी खाई में पड़े रहने पर विवश हैं तो यह सब इसलिए ही हुआ है क्योंकि सभी को सामान लाभ नहीं मिल सका है। जो सबसे निचला तबका है आज उसके उत्थान के लिए अगर अलग से कुछ कल्याणकारी योजनाएं बनाने की जरूरत है तो तभी बनाई जा सकती है जब जनसंख्या की सही गणना हो और उसके साथ जुटाए गए अन्य तथ्य सच पर आधारित हों आज अगर वर्तमान की बात की जाए तो करोड़ों लोग मनरेगा में मजदूरी कर रहे हैं। 80 करोड लोगों को सरकार मुफ्त राशन दे रही है। सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसियां इसकी जांच भी करती हैं कि क्या यह सब इन योजनाओं का लाभ पाने वाले उचित पात्र हैं। खैर यह अच्छी बात है कि अब जनगणना का कार्यक्रम घोषित हो गया है। कम से कम यह तो पता चल सकेगा की जनाधिक्ता की मार कहां पहुंच चुकी है इसे कैसे कम किया जाएगा और गरीबों के उत्थान के लिए कैसे प्रभावकारी योजनाएं लाई और लागू की जाएगी।




