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भाजपा में घमासान

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच एक तरफ जहां कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी श्ौलजा अपने पांच दिवसीय दौरे पर आई हुई है वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत की नाराजगी और कांग्रेस के अंतर्कलह अपने चरम पर है तो दूसरी ओर भाजपा खेमे में भी पार्टी नेताओं के बीच विरोध तथा असंतोष का लावा धधक रहा है। 6 पूर्व भाजपा नेताओं की ज्वानिंग पर पहले से ही असहज हो चुकी भाजपा के नेता अब कांग्रेसियों के उन बयानों को लेकर परेशान और बेचैन है जिसमें अभी अनेक कद्दावर नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। गणेश गोदियाल का दावा है कि अभी एक दर्जन नेता कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं जिनमें कई विधायक भी शामिल है उनका तो यहां तक कहना है कि हर महीने 6 नेताओं को कांग्रेस में शामिल किया जाएगा। 12 नेताओं की सूची पर तो विचार चल ही रहा है उनके पास और कई नेताओं की सूची आ चुकी है। श्ौलजा के दौरे का आज दूसरा दिन है कई लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि कुछ अन्य भाजपा नेताओं का आने वाले एक—दो दिन में ज्वानिंग कराई जा सकती है। भाजपा के अंदर मचे इस घमासान के कुछ ठोस कारण भी है। 10 सालों से केंद्र और प्रदेश की सत्ता में बैठी भाजपा के खिलाफ बड़ी एंटी इन्कैम्बसी एक अहम कारण है ही इसके साथ ही राज्य में पनपती सांप्रदायिकता तथा अंकिता भंडारी जैसे अन्य तमाम गंभीर मसले भी हैं। सामाजिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर लोगों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं और लोगों की बात तो छोड़िए खुद भाजपा के नेता भी अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर खुलकर बोल रहे हैं। अजय अजेन्द्र द्वारा तो अपने पोस्ट में यह तक कह दिया गया है कि ऐसी स्थिति में राजनीति से सन्यास ही एकमात्र विकल्प बचता है। एक समय था जब सबका साथ सबका विकास और विश्वास की बात करने वाली भाजपा पर आम आदमी ने भरोसा जताया था और तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं को भाजपा में बेहतर भविष्य दिखाई पड़ता था लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय व प्रांतीय स्तर तक अब उसकी वैसी छवि नहीं रह गई है। यही कारण है कि भाजपा के नेताओं का ही भाजपा से मोहभंग होता दिख रहा है और वह अपने राजनीतिक भविष्य के दूसरे विकल्प ढूंढने में लगे हुए हैं। यह सब कुछ एक दिन में नहीं हुआ है सत्ता के अहंकार और नेताओं की मनमानियो के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। वर्तमान समय में भाजपा के बड़े से बड़े नेताओं को अपने ऊपर यह भरोसा नहीं रहा है कि 2027 में उन्हें टिकट मिलेगा या नहीं। महेंद्र भटृ भाजपा नेताओं से अभी से आग्रह कर रहे हैं कि अनावश्यक रूप से टिकट की दावेदारी ना करें। धामी सरकार में 4 सालों से खाली पड़े पदों को चुनाव से 6 माह पूर्व भरे जाने की घटना को खुद भाजपा नेता कितना सही मानते हैं यह भी सब जानते हैं भले ही सीएम धामी जीत की हैट्रिक की घोषणा कर रहे हो लेकिन भाजपा के अंदर जो घमासान और असंतोष देखा जा रहा है उससे अभी यह भी साफ नहीं है कि कौन भाजपा में रहेगा और कौन नहीं। कांग्रेस ने अब जो दावा किया है वह सच है तो आने वाले समय में भाजपा के दर्जन भर से भी अधिक नेता कांग्रेस के पाले में खड़े दिखाई देंगे जिसका चुनाव पर असर पड़ना तय है।

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