उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा 8 अप्रैल यानी कि कल अपने पांच दिवसीय दौरे पर आ रही हैं। बीते दिनों दिल्ली में 6 लोगों की कांग्रेस में हुई ज्वाइनिंग के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की रामनगर क्षेत्र के नेता संजय नेगी को पार्टी में शामिल न करने को लेकर जो नाराजगी सामने आई है उसके मद्देनजर श्ौलजा का यह दौरा और भी महत्व का हो गया है और अब सभी की नजरे इस दौरे पर लगी हुई है। कांग्रेस के अंदर मचा यह घमासान वहां तक पहुंच चुका है कि कांग्रेस दो धड़ों में बट चुकी है। हरीश रावत गुट पार्टी पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सामूहिक स्तीफो और 2027 में फिर कांग्रेस की हार की धमकियां दे रहा है। बीते कल प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने एक पत्रकार वार्ता में यह कहा है कि जिसे भी जो कुछ कहना है वह अपनी बात पार्टी फोरम पर रखें साथ ही उनका कहना है कि पार्टी किसी भी पुराने कार्यकर्ता का पूरा सम्मान करेगी किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा उन्होंने स्पष्ट किया है कि संजय नेगी का नाम भी पार्टी में शामिल किए जाने वाले नेताओं की सूची में है। इस बीच हरीश रावत को मनाने और समझाने का काम भी किया जा रहा है। यशपाल आर्य का उनके घर जाकर उनसे मिलना और बात करना ऐसा ही प्रयास है। वह उनकी बात मानते हैं या नहीं यह अलग बात है लेकिन एक तरफ हरीश रावत और उनके समर्थक पार्टी पर जो दबाव की राजनीति कर रहे हैं उसे अनुचित ठहराने वाले नेताओं की भी पार्टी में कमी नहीं है तो वहीं दूसरी ओर उनकी उपेक्षा को गलत ठहराने वाले भी बहुत सारे लोग हैं। श्ौलजा और कांग्रेस हाईकमान की सोच पर ही यह निर्भर करेगा कि वह किसे तरजीह देते हैं। श्ौलजा की वर्तमान दौरे का जो रूट प्लान तैयार किया गया है उस पर गौर करें तो वह सबसे पहले रुद्रपुर जाएगी जहां से राजकुमार ठुकराल को अभी—अभी पार्टी में शामिल किया गया है। राजकुमार ठुकराल के राजनीतिक प्रभाव को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। भाजपा भी उन्हें पार्टी में शामिल करने के प्रयास कर रही थी पिछले चुनाव में वह अकेले अपने दम पर 27 हजार वोट लेने में सफल रहे थे। अब अगर कांग्रेस उन्हें टिकट देती है तो कांग्रेस व उनके अपने प्रभाव वाले वोटो को जोड़ दिया जाए तो उनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। कांग्रेस इस सीट पर कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी है। भाजपा के वर्चस्व वाली इस सीट पर कांग्रेस की मजबूत दावेदारी ठुकराल के कांग्रेस में आने पर बनी है। श्ौलजा का यहां से दौरा शुरू करना व इसके बाद हल्द्वानी और नैनीताल जाना और कार्यकर्ताओं से मिलने का कार्यक्रम है। इसके बाद वह हरिद्वार, रुड़की जाएगी उनके इस पांच दिवसीय दौरे में उन सभी क्षेत्रों का दौरा शामिल है जिन क्षेत्रों के छह नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया है। इस दौरे से वह इस बात को परखेंगी कि उनकी ज्वाइनिंग पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की क्या प्रतिक्रियाएं हैं। इसका सीधा अर्थ है कि कांग्रेस अब किसी नेता विशेष के नाम को नहीं उस पर कितनी आम सहमति है उसकों प्राथमिकता देगी। भले ही हरीश रावत व उनके समर्थकों द्वारा दबाव की राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही हो लेकिन पार्टी किसी के दबाव में अपने फैसले नहीं करेगी न अपने फैसले बदलेगी। हरीश रावत हो सकता है कि राजनीतिक अवकाश का सहारा लेते हुए श्ौलजा से मिलने भी न जाए। श्ौलजा उनसे मिलने जाएगी यह भी संभव नहीं है। श्ौलजा के इस दौरे से पूर्व ही जो संकेत मिल रहे हैं वह हरीश रावत के लिए तो अच्छे दिखाई नहीं दे रहे हैं।




