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लोकतंत्र की लड़ाई अब सड़कों पर आई

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लोकतंत्र और संविधान बचाव की लड़ाई अब सड़कों पर आ गई है। पीएम मोदी ने दिल्ली में ए आई समिट में हुई फजीहत और अंतर्राष्ट्रीय बेज्जती की खीज में मेरठ में कांग्रेस पर जिस तरह से अपनी भड़ास निकाली और कांग्रेस प्रदर्शन को लेकर अपना आक्रोश निकाला उससे ऐसी चिंगारी भड़की कि यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों और राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु की गिरफ्तारी तथा चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजे जाने के बाद यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता कल रात से ही सड़कों पर उतर चुके हैं। उदय भानु जो दिल्ली में हुए प्रदर्शन में भी शामिल नहीं थे उन्हें पुलिस हिरासत में लिए जाने और 40 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किये जाने तथा उन पर आतंकवाद व देशद्रोह जैसी धाराओं में केस दर्ज किए जाने को लेकर कांग्रेस आग बबूला है तथा बीती रात से ही दिल्ली से लेकर दून तक पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर है एक अरसे बाद कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं कि गिरफ्तारी के समर्थन में खुली जंग का ऐलान कर दिया है। राहुल गांधी ने इनको बब्बर शेर बताते हुए कहा है कि उन्हें किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। विरोध प्रदर्शन हमारा संवैधानिक अधिकार है उधर उदय भानु के माता—पिता ने इस गिरफ्तारी को असंवैधानिक और कायरता बताते हुए कहा है कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है कि वह देश और संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहा है। हो सकता है की डर और भय दिखा कर विपक्ष को चुप कराने की कोशिश में जुटी भाजपा व पीएम मोदी को इस बात का अंदाजा न हो कि उदय की गिरफ्तारी की गलती उन पर इतनी भारी पड़ जाएगी। लेकिन अब तो कमान से तीर निकल चुका है। देश भर में 5 करोड़ से अधिक युवा कांग्रेस के रजिस्टर्ड सदस्य है एक अन्य खास बात यह है कि पूरी कांग्रेस पार्टी और समूचे विपक्ष दल के नेताओं का भी कांग्रेस केे इस विरोध में समर्थन मिल रहा है। एक अन्य बात यह है कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों तानाशाही से ऊब चुके लोग और खास तौर से देश के युवा और किसान भी कांग्रेस के समर्थन में खड़े हो चुके हैं। राहुल गांधी के इस ऐलान के बाद की अब वह एक कदम भी पीछे हटने वाले नहीं है। यह साफ हो चुका है कि यह आग अब उस हद तक भड़क चुकी है कि वह सहज शांत होने वाली नहीं है। उदय भानु के माता ने देश के लोगों से खासकर युवाओं से अपील की है कि देश और लोकतंत्र तथा संविधान बच़ाने की इस लड़ाई में वह उनके साथ आए। निश्चित तौर पर यह स्थिति अब ऐसे खतरनाक मोड़ पर आ चुकी है जिसके परिणाम के बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। बात चाहे उस फाइल की हो जिसमें हरदीप पुरी से लेकर पीएम मोदी और उनके उघोगपति के नाम सामने आ रहे हैं चाहे उसे ट्रेड डील की हो जिसे अमेरिका के दबाव में किया जा रहा है तमाम इन मुद्दों के बीच अब ई समिट में हुई भारी गड़बड़ी की हो जिसे लेकर सत्ता पक्ष को अपने बचाव का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने युवाओं को लेकर एक सामान्य प्रदर्शन की आड़ में छेड़ कर ततइयों के छत्ते में हाथ डाल दिया है जिससे निपटना अब उसके लिए आसान नहीं होगा। ऐसा करके शायद सरकार अब अति से अंत की ओर एक और कदम बढ़ा चुकी है।

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