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फुटपाथ बना बाजार, प्रशासन बेखबर

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देहरादून। पल्टन बाजार में दुकानों के बाहर दुकानें सजने से यातायात प्रभावित हो रहा है लेकिन नगर निगम प्रशासन व पुलिस विभाग मौन साधे हुए है। जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है।
शहर में अतिक्रमण अपने पूरे सबाब में दिखायी दे रहा है। जहां तहां देखों लोगों ने अतिक्रमण कर अपनी दुकानें सजायी हुई हैं। यह हाल अन्य जगहों से ज्यादा पल्टन बाजार क्षेत्र में देखने को मिलता है। घंटाघर से शुरू होने वाले पल्टन बाजार में शुरू से ही दुकानों के बाहर दुकानें सजी दिखायी दे जाती है। जहां एक ओर पुलिस व नगम प्रशासन पल्टन बाजार में ठेली लगाकर सामान बेचने वालों के खिलाफ आये दिन कार्यवाही करते नजर आ जाता है और गरीब ठेली वाले का सामान जब्त कर लिया जाता है और गरीब तबके के लोग कोतवाली के बाहर हसरत भरी निगाह से देखते हुए दिखायी देते हैं कि कब कोतवाल व पुलिस वालों का दिल पसीजे और वह उनका सामान उनको वापस कर दे। लेकिन यहीं पर यह देखने को मिलता है कि पुलिस व नगर निगम प्रशासन दुकानों के बाहर अवैध रूप से सजी दुकानों की तरफ से आंखे मूंद कर निकल जाते हैं। क्योकि उनको पता होता है कि यह दुकान सम्बन्धित दुकान स्वामी की रजामंदी से लगी हुई है और इससे दुकान स्वामी को आर्थिक मदद मिलती है।

यह हाल पल्टन बाजार का ही नहीं, मोतीबाजर, सब्जी मण्डी, हनुमान चौक, बैण्ड बाजार, तिलक रोड, राजा रोड आदि क्षेत्रों में भी यही स्थिति दिखायी देती है लेकिन यहां पर पुलिस व निगम प्रशासन मौन साधे दिखायी देता है। या तो उनको यह दिखायी नहीं देता या फिर वह व्यापारियों से डरते हैं कि कहीं व्यापारी वर्ग उनके विरूद्ध न खडा हो जाये जिससे उनको काफी परेशानी का सामना करना पड सकता है। यही डर उनको कार्यवाही करने से शायद रोकता है। लेकिन गरीब ठेली वालों के खिलाफ कार्यवाही के लिए वह एक दम खडे हो जाते हैं। यहां तक उनकी ठेलियां जब्त कर ली जाती है। जबकि वह गरीब ठेली भी किराये पर लेकर आते हैं जिसके चलते एक तो उनको सामान जब्त हो जाता है तथा दूसरी मार उनको किराया नियमित देना पडता है चाहे काम हो या न हो ठेली का किराया तो देना ही है। यह दोहरी मार झेल रहे ठेली वालों की सुनने को कोई तैयार नहीं है। जबकि दूसरी तरफ दुकानों के बाहर धडल्ले के साथ अपनी दुकान सजाकर अपना सामान बेचते दिखायी देते हैं और वह भी अगर उनके सामाने कोई ठेली वाला दो मिनट के लिए रूक जाये तो उसको वह अवैध दुकान स्वामी धमका कर वहां से भगा देता है। अब सोचने वाली बात यह है कि इनपर लगाम कौन कसेगा? क्या पुलिस व निगम प्रशासन को यह दुकानों के बाहर लगने वाली अवैध दुकानें दिखायी नहीं देती है। अब यहां सोचने वाली बात है कि इन अवैध दुकानों पर लगाम कौन लगायेगा।

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