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जल प्रलय की मार

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इन दिनों उत्तराखंड में आसमान से आफत की बरसात हो रही है। नदी—नाले खाले उफान पर हैं। घाट और मठ—मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। पानी का वेग अपने साथ सब कुछ बहा कर ले जाने को बेताब है। पहाड़ पर हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ दरक रहे हैं। मलवा रास्ते रोक कर खड़ा है, पहाड़ से पत्थरों की बरसात बचाव और राहत कार्य में बाधा खड़ी कर रही है। हालात इतने अधिक गंभीर हो चुके हैं कि चार धाम यात्रा पर यात्रियों को वह जहां है वहीं रोक दिया गया है। जो धामों तक पहुंच गए थे उनके वापस आने के रास्ते बंद हैं और जो धामों की तरफ जा रहे थे वह हरिद्वार से लेकर सोनप्रयाग और रुद्रप्रयाग तथा चमोली व जोशीमठ के रास्ते में फंसे हुए हैं। धामाें तक आगे जाने के सभी रास्ते कई जगह बंद हो चुके हैं और जब तक इन रास्तों को नहीं खोला जाता तब तक इन यात्रियों के जहां फंसे हैं वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं है। यह संकट इसलिए भी अधिक गंभीर होता दिखने लगा है क्योंकि 1 जुलाई तक राज्य के मौसम में किसी तरह के सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है बल्कि और भी अधिक बिगड़ने की संभावनाएं हैं। मौसम विभाग द्वारा अगले 24 घंटे के लिए राज्य के सात जिलों में रेड अलर्ट जारी करते हुए कहा गया है कि इस दौरान भारी से भी भारी बारिश की संभावना है। राज्य की 100 से अधिक सड़कों पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। कहीं सड़कों का नामोनिशान मिट गया है तो कहीं पुल और पुलिया बह जाने से आवागमन अवरुद्ध हो गया है। भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से तेजी आई है तथा इन सड़कों पर यातायात को सुचारू बनाना अब आसान काम नहीं रह गया है। बीती रात उत्तरकाशी के बड़कोट में बादल फटने की घटना के बाद यहां तक बचाव व राहत दल का पहुंचना भी मुश्किल हो गया प्रदेश के दर्जनों गांवों में भूस्खलन की घटनाओं से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है, वहीं स्थिति शहरों की भी ठीक नहीं है। राजधानी दून में एक दो मंजिला मकान दरक गया वहीं एक चार मंजिला छात्रावास को खतरे की जद में आने से रात में ही खाली करना पड़ा। बागेश्वर में सैकड़ो मकान भूस्खलन की जद में आ चुके हैं तथा पहाड़ों से आने वाला मलवा व पानी बिजली के खंभे तथा घरों को अपने साथ बहा ले गया। नदियों ने रौद्र रूप ले लिया है उनका जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच चुका है आने वाले दो—तीन दिन अगर राज्य में बारिश का यही क्रम जारी रहा तो राज्य के मैदानी हिस्सों में बाढ़ के गंभीर हालत पैदा हो जाएंगे। राज्य के दर्जनों गांवों का संपर्क टूट जाने से इन क्षेत्रों में आने वाले दिनों में अगर कोई अप्रिय घटना भी होती है तो ऐसे में उन तक कोई मदद पहुंचाना भी मुश्किल हो जाएगा। शासन—प्रशासन द्वारा इस संभावित खतरे को देखते हुए यात्रा को रोकने के अलावा लोगों से घरों से न निकलने की अपील की गई है। शासन तथा आपदा प्रबंधन की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य में अब तक धमाकेदार मानसूनी बरसात नें जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। आने वाले तीन दिन गुजर जाने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इस आपदा में कहां कितना नुकसान हुआ है। इस दौरान लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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