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नाराजगी के गुब्बारे की निकली हवा

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कांग्रेसी विधायकों की बैठक अब तक भी नहीं हो सकी

देहरादून। हाईकमान के फैसले से नाराज कांग्रेसी विधायकों की बैठक तीन दिन बाद भी नहीं हो सकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी अनुशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले इन विधायकों को भी हाईकमान के उन निर्देशों की हवा लग चुकी है जिसमें सख्त रुख अपनाए जाने की बात कही गई है।
अब इन नाराज विधायकों की बैठक होगी भी या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता है। हां यह बात जरूर सामने आई है कि अब इन नाराज विधायकों की बैठक का नेतृत्व करने को कोई भी तैयार नहीं है। मीडिया में धारचूला विधायक हरीश धामी जिन्होंने सीएम धामी के लिए सीट छोड़ने की बात कही थी उनके खिलाफ पार्टी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह खबर मीडिया में आने के बाद से इन विधायकों के तेवर अब ढीले पड़ चुके हैं। हरीश धामी के तेवर भी हरीश रावत से मुलाकात के बाद बदले हुए हैं। बताया जा रहा है कि उनके इस काम को हरीश रावत ने भी गलत बताते हुए आगे कुछ न कहने या करने की नसीहत उन्हें दी है।
दूसरी तरफ कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी इन नाराज विधायकों से बात करने की जिम्मेवारी सौंपी गई है। जो इन्हें संपर्क साधने में लगे हुए हैं साथ ही हाईकमान की नाराजगी से उन्हें अवगत कराया जा रहा है। इस सबके बावजूद भी अगर कोई कांग्रेसी विधायक मनमानी करता है तो कांग्रेस उसे बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं करेगी। भाजपा में जाकर भी इन विधायकों का कुछ भला नहीं हो सकता है इस बात को भी यह कांग्रेसी विधायक बखूबी जान समझ रहे हैं। यही कारण है कि वह जिस तरह की दबाव की राजनीति करना चाह रहे थे अब उस गुब्बारे की हवा निकल चुकी है। देखना होगा कि अब वह आगे बैठक करते हैं या नहीं। हालांकि हरीश रावत द्वारा यह कहा जाना कि कोई कहीं नहीं जाएगा सब समझते हैं। यह भाजपा का फैलाया हुआ भ्रम है यह बताने के लिए काफी है कि इस नाराजगी के कोई मायने नहीं रहे हैं।

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