उत्तराखण्ड सड़क हादसों कें मामलो में अव्वल प्रदेश बन चुका है। यहंा ऐसा कोई दिन नहीं है जब सड़क हादसों में लोगों को जान से हाथ न धोना पड़ रहा हो। ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने इन सड़क हादसों को रोकने के कोई प्रयास न किये गये हो लेकिन इन प्रयासों में कितनी सफलता हासिल की गयी है यह तस्वीर आये दिन लोगों के सामने आती रहती है। बीते रोज राज्य के उधमसिंहनगर जिले में घटी एक सड़क दुर्घटना में तीन घरों के चिराग बुझ गये। जिसके बाद उनके गांव में मातम पसरा हुआ है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलो में अगर राज्य की राजधानी देहरादून की बात की जाये तो यहंा भी तकरीबन हर तीसरे दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। हालांकि पुलिस विभाग हर रोज चैकिंग अभियान चलाकर लोगों के चालान जरूर करता है लेकिन इन सड़क दुर्घटनाओं में कमी नहीं देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि पुलिस शाम के समय तक ही चैकिंग अभियान चलाती है और लोगों के ड्रिंक एंड ड्राइव में चालान करती है जबकि यहंा बड़े सड़क हादसें रात को घटित होते है। जब लोग शराब पीकर रात को राजधानी की सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाते है। अभी दो वर्ष पूर्व कैंट थाना क्षेत्र में कार सवार कुछ युवाओं की मौत हो गयी थी जिसमें पता चला कि वह शराब पीकर तेज गति से कार चला रहे थे। बीते वर्ष आराघर चौकी के पास जब पुलिस कर्मियों द्वारा बैरिकेटिंग लगाकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच की जा रही थी तो वाहन चालक द्वारा पुलिसकर्मियों पर ही वाहन चढ़ाकर भागने का प्रयास किया गया। जिसके बाद गम्भीर रूप से घायल पुलिस कर्मियों को अस्पताल पहुंचाया गया। यह सब हादसे देर रात ही घटित हुए है और यह बताने के लिए काफी है कि देर रात ही असल पुलिस चैकिंग की जरूरत है तभी जाकर इन सड़क हादसों में कमी लाई जा सकती है।




