हज़्बंड कहते हैं कि काश तुम अंगूरी जैसी होतीं: शुभांगी अत्रे

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लाइफ मटीरियलिस्टक हो गई है। इमोशंस इमोजी के जरिए शेयर किए जाते हैं। खुश होने का दिखावा सिर्फ सेल्फी लेते वक्त किया जाता है। ऐसे में हर किसी को जिंदगी में अंगूरी भाभी जैसे किरदारों की जरूरत है, जिसमें मासूमियत हो, सरलता हो, दूसरों के लिए केयर और फरेब से कोसों दूर हो। शायद, यही कारण है कि ऑडियंस इस किरदार को खूब पसंद कर रही है।

यह बात रविवार को लखनऊ आईं अंगूरी भाभी (शुभांगी अत्रे) भी महसूस करती हैं। वे कहती हैं कि जब आप किसी लोकप्रिय किरदार को रिप्लेस करते हैं तो निश्चित तौर पर दबाव होता है। हालांकि, इस बात का प्रेशर लिए बिना अपना बेस्ट देना ही कलाकार की पहचान है। यही नहीं, खुद में अंगूरी भाभी जैसी सरलता लाने के लिए शुभांगी ने लालू यादव की वाइफ राबड़ी देवी के विडियोज की मदद ली है।

इंदौर जैसा लगता है लखनऊ
इंदौर से ताल्लुक रखने वाली शुभांगी कहती हैं कि लखनऊ मुझे इंदौर जैसा ही लगता है। मुंबई का माहौल बहुत कमर्शलाइज्ड है और लाइफ बहुत फास्ट है। हर कोई वहां बहुत प्रैक्टिकल है और सभी भागदौड़ में लगे हैं। वहीं, लखनऊ ऐसा है, जहां आकर अपनापन सा फील होता है। मैं कथक डांसर हूं। ऊपर से लखनऊ कथक घराना भी है, जहां से बड़े-बड़े कलाकार निकले हैं। शायद, यही कारण है कि लखनऊ से मेरा खास अटैचमेंट है। मैं जरूर चाहूंगी कि फ्यूचर में कभी मुझे लखनऊ आने का मौका मिले और मैं अॅडियंस के सामने क्लासिकल कथक परफॉर्मेंस दूं। हाल ही में जब मेरे डायरेक्टर को पता चला कि मैंने कथक सीखा है तो उन्होंने एक एपिसोड में खास तौर पर कथक परफॉर्मेंस वाला छोटा सीन रखवाया था।

यूपीवाला माहौल रहता है सेट्स पर
भाभीजी के सेट पर सिर्फ शूटिंग ही नहीं होती बल्कि ढेर सारी मस्ती भी होती है। सेट पर कभी मैं अनारकली बन जाती हूं, कभी बैंड बाजा लिए बाराती तो कभी काला चश्मा गाने पर डांस करने लगती हूं। सबसे खास बात है कि हमारे राइटर यूपी से हैं। डायरेक्टर दिल्ली से और मैं एमपी से होने के बावजूद पूरा माहौल यूपीवाला रहता है। यूपी की भाषा की खुशबू हमेशा आती रहती है। फिर चाहे वह घुइयां के खेत में हो या फिर हिप्पी हो गए हैं जैसे तकिया कलाम।

अगर मैं अंगूरी भाभी के रोल को रिप्लेस करने और इस भाषा में खुद को ढालने की बात करूं तो मुझे लगता है कि इस बात को लेकर दबाव तो था क्योंकि शो में यह किरदार बहुत हिट हुआ था। ऐसे में हर किसी की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। हालांकि, मैंने कभी इस बात को लेकर दबाव महसूस नहीं किया। मेरा मानना है कि अगर आप किसी चीज को पाने की कोशिश करते हैं तो वह एफर्ट्स खाली नहीं जाते।

इस रोल का क्रेडिट मैं अपने राइटर और डायरेक्टर को देना चाहती हूं। दरअसल, इस किरदार को इतनी खूबसूरती से लिखा गया है कि कई बार मुझे भी अहसास होता है कि अंगूरी कितनी प्यॉर और भोली है। उसे दुनियादारी से कोई मतलब नहीं है। वह हर किसी की बातों में आ जाती है और मन की बहुत साफ है। उसके अंदर किसी तरह की मिलावट नहीं है। मेरे हज़्बंड कहते हैं कि काश तुम अंगूरी जैसी होतीं।

मुझे लगता है कि हर किसी की लाइफ में एक अंगूरी भाभी जैसे किरदार की जरूरत होती है, जो इनोसेंस और प्यॉरिटी बचाए रखे। हम मटीरियलिस्टिक लाइफ में खुद को इस कदर फंसा चुके हैं कि चाहकर भी सभी चीजें अपने अंदर नहीं ला सकते। हम अंगूरी को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उसके जैसे कम ही लोग हमारे आसपास देखने को मिलते हैं।(आरएनएस)

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