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डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा, कांग्रेस के तेवर तेज

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रिजार्ट पर बुलडोजर, सबूत मिटाने का प्रयासः हरीश
इंसाफ करना है तो पूरा इंसाफ करो अधूरा क्यों ?

देहरादून। भर्ती घोटालों को लेकर राज्य में भाजपा सरकार के खिलाफ युवाओं का आक्रोश अभी थमा भी नहीं है कि अंकिता मर्डर केस को लेकर सरकार के खिलाफ एक और बड़ा जनांदोलन खड़ा हो गया है।
पेपर लीक और विधानसभा बैक डोर भर्तियों के मामले में भाजपा सरकार ने जो चुस्ती फुर्ती दिखाई है वह बेवजह नहीं है। दोनों मामलों में भाजपा के नेताओं की संलिप्तता उजागर होने पर भाजपा सरकार के सामने अपनी छवि को बचाने का जो संकट पैदा हो गया था उसकी क्षतिपूर्ति उसके द्वारा करने के प्रयास में ही पेपर लीक मामले में इतनी बड़ी कार्रवाई करने और विधानसभा में गलत तरीके से हुई भर्तियों को रद्द करने का दबाव बना। अब इसे भाजपा नेता सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। ठीक वैसे ही अंकिता मर्डर केस जिसका सीधा संबंध भाजपा नेता से जुड़ा, पर सख्त कार्रवाई के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि हमने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की है। लेकिन सवाल फिर भी अनगिनत है जिन्हें लेकर कांग्रेस भाजपा की घेराबंदी कर रही है और कांग्रेस को सड़कों पर उतरकर धरने प्रदर्शनों का मौका मिला है।
अंकिता मर्डर केस में शासन—प्रशासन की जो बड़ी लापरवाही सामने आई है उसे लेकर भारी जनाक्रोश है। आधी रात को आरोपी के रिजार्ट पर बुलडोजर की कार्रवाई को कांग्रेस द्वारा साक्ष्य मिटाने का प्रयास बताया जा रहा है। मामला क्याेंकि कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है इसलिए अति संवेदनशील है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ सरकार की कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं तो हरीश रावत ने उनसे पूछा है कि 6 दिन तक शासन—प्रशासन कहां सोया रहा? उन्होंने कहा कि कार्यवाही के नाम पर आरोपी का रिजार्ट तोड़कर सबूत क्यों मिटाये जा रहे हैं अगर साक्ष्य नहीं होंगे तो आरोपियों को सजा कैसे मिलेगी। भर्ती मामले में भी उन्होंने जांच और नौकरियां रद्द करने के फैसले को अधूरी कार्यवाही बताया था उनका कहना था कि नौकरी पाने वालों पर तो कार्रवाई हो गई लेकिन जिन्होंने अवैध तरीके से नौकरियां दी उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। मुख्यमंत्री भर्तियों को रद्द करने के फैसले के बाद रहे हैं कि चैप्टर क्लोज हो चुका है। यह कैसा इंसाफ है, इंसाफ करना है तो पूरा इंसाफ करो।

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